और बढ़ने की धारणा
राजकुमार मल
भाटापारा- पर्व की मांग लेकिन शॉर्ट है सप्लाई, फलत: सूखे मेवे में कीमत बढ़ने लगी है। तेजी सबसे ज्यादा उस मखाना में आ चुकी है, जिसमें देश स्तर पर मांग निकली हुई है। और महंगे हो सकते हैं सूखे मेवे क्योंकि सप्लाई बेहद शॉर्ट हो चली है। आयात के रास्ते फिलहाल अस्थाई रूप से बंद हैं इसलिए चिलगोजा और पिस्ता जैसे मेवे अब क्रयशक्ति से बाहर हो चले हैं। फलस्वरुप मेवों की दूसरी किस्मों में मांग का दबाव बढ़ा हुआ है।

मखाना मुस्कुरा रहा
बिहार में होती है मखाना की व्यावसायिक खेती। देश की कुल मांग का 75 फ़ीसदी हिस्से की आपूर्ति करने वाला यह राज्य इस समय निर्यात सौदे को प्राथमिकता दे रहा है। इसलिए घरेलू बाजार में मखाना की प्रति किलो कीमत 1400 से 1600 रुपए बोली जा रही है। तेजी की धारणा को इसलिए भी बल मिल रहा है क्योंकि सीजन की मांग निकली हुई है।
गर्मी दिखा रहे यह दोनों
न्यूनतम 720 रुपए। अधिकतम 1280 रुपए किलो। अंजीर में यह तेजी इसलिए क्योंकि इसमें मांग अंजीर से मिठाई बनाने वाली इकाइयों की निकली हुई है। घरेलू मांग अलग से बढ़ी हुई है। पिस्ता 1200 से 1250 रुपए किलो की कीमत के साथ मेवों की मांग में बना हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा डिमांड पैक्ड मेवा बेचने वालों की बनी हुई है इसलिए और वृद्धि की आशंका है।

स्थिर है यह मेवे
बादाम 800 रुपए ,काजू 880 रुपए, किशमिश 560 से 570 रुपए किलो, मुनक्का 600 रुपए, खजूर 200 रुपए किलो और अखरोट गिरी 1320 रुपए किलो पर स्थिर है। मांग सिर्फ मेवों से मिठाई बनाने वाले स्वीट कॉर्नरों की ही है लेकिन अब यह भी कम होती नजर आ रही है। इसके बावजूद यह मेवे इस दाम पर ही बने रहेंगे। ऐसी धारणा मेवा बाजार को है।
