खैरागढ़/छुईखदान-संडी | खैरागढ़ जिले में प्रस्तावित श्री सीमेंट के 404 हेक्टेयर खनन और औद्योगिक प्रोजेक्ट को लेकर विवाद लगातार तेज होता जा रहा है। शांत बैठकों और विरोध प्रदर्शनों के बीच हुए हालिया उपद्रव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी बीच, कंपनी प्रबंधन का कहना है कि कुछ लोग गलत सूचनाएँ फैलाकर ग्रामीणों में भ्रम फैला रहे हैं और अनावश्यक विरोध खड़ा किया जा रहा है।

कंपनी बोली—ना विस्थापन होगा, ना पर्यावरण को नुकसान
खैरागढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कंपनी अधिकारियों ने प्रोजेक्ट को विकास का अवसर बताते हुए कहा कि इससे स्थानीय क्षेत्र में रोजगार, सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा। उनका दावा है कि—
- किसी भी गांव का विस्थापन नहीं किया जाएगा
- पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन होगा
- स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा
कंपनी ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा फैलाई जा रही भ्रमित करने वाली सूचनाओं के चलते ग्रामीणों में गलतफहमियाँ पैदा हो गई हैं।
कलेक्टर बोले—संवाद से दूर होंगे भ्रम
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मौजूद खैरागढ़ कलेक्टर इंद्रजीत चंद्रवाल ने कहा कि ग्रामीणों के मन में कई शंकाएँ हैं, जिन्हें संवाद के माध्यम से दूर किया जाएगा।
कलेक्टर का कहना है—
- 11 दिसंबर की जनसुनवाई ग्रामीणों के लिए अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराने का वैधानिक अधिकार है
- प्रशासन चाहें तो अलग से भी बातचीत कर सकता है
- उद्देश्य है कि स्थिति स्पष्ट और पारदर्शी बनी रहे
विधायक यशोदा वर्मा का कड़ा विरोध
वहीं क्षेत्र की विधायक यशोदा वर्मा इस प्रोजेक्ट का जोरदार विरोध कर रही हैं। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जनसुनवाई को तुरंत रद्द करने की मांग की है।
विधायक का तर्क है—
- किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि पर भारी औद्योगिक प्रोजेक्ट थोपना उचित नहीं
- यदि जनसुनवाई रद्द नहीं की गई, तो बड़ा आंदोलन अनिवार्य
- कंपनी की रिपोर्ट में सिर्फ 138 रोजगार का उल्लेख, जो हजारों किसानों की जमीन के बदले बेहद कम
किसानों ने भी चिंता जताई है कि औद्योगिक गतिविधियों से खेती, पर्यावरण और भविष्य की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
विकास बनाम खेती—विवाद दो ध्रुवों में बंटा
पूरा मामला अब विकास और कृषि हितों के बीच टकराव का रूप ले चुका है।
- एक ओर कंपनी और प्रशासन हैं, जो परियोजना को क्षेत्र के विकास का आधार बताते हुए संवाद पर जोर दे रहे हैं।
- दूसरी ओर किसान और जनप्रतिनिधि हैं, जो जमीन, पर्यावरण और आजीविका को लेकर दृढ़ हैं।
अब सबकी निगाहें 11 दिसंबर की जनसुनवाई पर टिक गई हैं।
यही तय करेगा कि प्रोजेक्ट आगे बढ़ेगा या विरोध और उग्र होगा।