सिंगरौली। मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले से जालसाजी का एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यहाँ भू-माफिया और रसूखदारों ने बेशकीमती जमीन हथियाने के लिए एक मृत महिला को कागजों में दोबारा ‘मार’ दिया। हैरानी की बात यह है कि जिस महिला का अंतिम संस्कार साल 1989 में हो चुका था, उसका दूसरा डेथ सर्टिफिकेट 24 साल बाद यानी 2013 में फिर से बनवा लिया गया।
धतूरा गांव की रहने वाली कलावती उपाध्याय की मृत्यु रिकॉर्ड के अनुसार 25 फरवरी 1989 को हुई थी। नियमानुसार उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी हुआ था। लेकिन जमीन के लालच में उनके ही कुछ करीबियों ने तहसील और नगर निगम के कर्मचारियों के साथ मिलकर साजिश रची। इस खेल को अंजाम देने के लिए वार्ड पार्षद का फर्जी प्रमाण पत्र और कूटरचित वसीयत का सहारा लिया गया, जिसके आधार पर साल 2013 में एक नया मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करवाकर जमीन का नामांतरण भी अपने पक्ष में करा लिया गया।
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब मामला एसडीएम की जांच तक पहुंचा। जांच में स्पष्ट हुआ कि नगर निगम के रिकॉर्ड में महिला की मौत 1989 में दर्ज है, फिर भी 2013 का दूसरा सर्टिफिकेट कैसे जारी हुआ? सितंबर 2025 में कलेक्टर ने भी इस मामले में दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे, लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी प्रशासन मौन साधे बैठा है। फिलहाल पीड़ित पक्ष न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।