गरियाबंद में विकास की बलि चढ़ती सुरक्षा कलेक्ट्रेट के सामने नेशनल हाईवे ने खोदे गड्ढे नियमों को ठेंगे पर रख रहा ठेकेदार ।

जिला मुख्यालय की सड़कों पर इन दिनों सफर करना किसी जंग जीतने से कम नहीं है। सर्किट हाउस से लेकर मजरकट्टा तक बन रहे नेशनल हाईवे का निर्माण विकास कम और विनाश का डर ज्यादा पैदा कर रहा है। आलम यह है कि खुद जिले के आला अधिकारियों की आंखों के सामने, कलेक्ट्रेट के ठीक बाहर, नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ठेकेदार की मनमानी और अधिकारियों की चुप्पी ने इस सड़क को हादसों के हॉटस्पॉट में बदल दिया है। सड़क निर्माण का प्राथमिक सिद्धांत है कि यातायात बाधित न हो और लोगों की जान सुरक्षित रहे। तकनीकी रूप से एक तरफ का निर्माण पूरा होने के बाद ही दूसरी तरफ खुदाई की जानी चाहिए, ताकि राहगीरों को निकलने का सुरक्षित रास्ता मिले। लेकिन गरियाबंद में गंगा उल्टी बह रही है। यहाँ सड़क के दोनों किनारों को एक साथ खोदकर छोड़ दिया गया है। सूत्रों की मानें तो अब तक कई दोपहिया वाहन चालक इन गड्ढों का शिकार होकर चोटिल हो चुके हैं।
सुरक्षा मानकों का नामोनिशान नहीं
हैरानी की बात यह है कि निर्माण स्थल पर न तो रेडियम रिफ्लेक्टर हैं, न ही बैरिकेडिंग रात के अंधेरे में ये गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे राहगीर सीधे काल के गाल में समाने को मजबूर हैं। पहले मुरुम खनन को लेकर हुए विवाद के बाद काम रुका था, लेकिन अब सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर जिस तरह से काम हो रहा है, वह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही विभाग की नींद खुलेगी?

सुरक्षा मानकों का अकाल न बैरिकेड्स, न इंडिकेटर
सड़क सुरक्षा की गाइडलाइन कहती है कि निर्माण स्थल पर रिफ्लेक्टर, रेडियम टेप, बैरिकेडिंग और ‘कार्य प्रगति पर है’ जैसे चेतावनी बोर्ड होने चाहिए। विडंबना देखिए, गरियाबंद में इनमें से एक भी इंतजाम नजर नहीं आता। रात के अंधेरे में ये गहरे गड्ढे वाहन चालकों को दिखाई नहीं देते, जिससे दोपहिया वाहन चालक सीधे इन जानलेवा गड्ढों में समा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार केवल अपना मुनाफा और काम की रफ्तार देख रहा है, जनता की जान की उसे कोई परवाह नहीं है।
पुराना विवाद और अब नई लापरवाही
यह निर्माण शुरू से ही विवादों के घेरे में रहा है। बीते दिनों नए तालाब से बिना अनुमति अवैध रूप से मुरुम खनन कर हाईवे में डालने को लेकर बड़ा बवाल हुआ था, जिसके बाद मुरुम का काम बंद करना पड़ा। अब सड़क के दोनों ओर खुदाई कर जनता की जान जोखिम में डाल दी गई है। जिला प्रशासन की नाक के नीचे चल रही इस अनियमितता पर किसी भी अधिकारी द्वारा कार्रवाई न करना कई तरह के संदेह पैदा करता है।

जल्दबाजी के आगे नियम बौने
ऐसा कोई नियम नहीं है कि एक ही साइड गड्ढा करना है। निर्माण कार्य जल्द पूरा करने के उद्देश्य से दोनों ओर गड्ढे करके सड़क निर्माण कर सकते हैं। हमने नियम की गाइडलाइन का पालन किया है।
जेपी कौशल, एसडीओ, नेशनल हाईवे


सवाल जो जवाब मांगते हैं
1 क्या जल्द काम पूरा करने की होड़ किसी की जान से ज्यादा कीमती है?
2 बिना बैरिकेडिंग और इंडिकेटर के काम करने की अनुमति किस अधिकारी ने दी?
3 कलेक्ट्रेट के सामने हो रही इस लापरवाही पर जिला प्रशासन मौन क्यों है?

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