कांकेर कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास धारा 163 लागू, पराली प्रबंधन के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने दिया यूरिया उपचार का प्रशिक्षण

कांकेर/जगदलपुर। कांकेर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने कलेक्ट्रेट परिसर और उसके आसपास 200 मीटर की परिधि में सुरक्षा व लोक शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश 4 फरवरी 2026 से 3 अप्रैल 2026 तक कुल 60 दिनों के लिए प्रभावी रहेगा। इस अवधि के दौरान उक्त क्षेत्र में धरना, प्रदर्शन, सभा, रैली और नारेबाजी पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी।

वहीं, कृषि क्षेत्र में पराली जलाने की समस्या के वैज्ञानिक समाधान और पशुचारे की कमी को दूर करने के लिए शहीद गुंडाधुर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र जगदलपुर ने विशेष पहल की है। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आर.एस. नेताम के निर्देशन में वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि वे खेतों में पैरा जलाने के बजाय यूरिया उपचार तकनीक अपनाएं। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषण रुकेगा, बल्कि पशुओं को पौष्टिक आहार भी मिलेगा।

यूरिया उपचार की वैज्ञानिक विधि के बारे में सहायक प्राध्यापक डॉ. नीता मिश्रा ने बताया कि एक क्विंटल पैरा कुट्टी पर चार प्रतिशत यूरिया के घोल का परत-दर-परत छिड़काव किया जाता है। इसके बाद इसे तीन सप्ताह तक वायुरहित स्थिति में दबाकर रखा जाता है। इस प्रक्रिया से पैरे में प्रोटीन की मात्रा बढ़कर छह से आठ प्रतिशत हो जाती है और यह पशुओं के लिए सुपाच्य बन जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, साधारण पैरे की तुलना में यह उपचारित चारा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में सहायक होता है।

कृषि महाविद्यालय प्रबंधन ने क्षेत्र के किसानों से इस तकनीक को अपनाने का आग्रह किया है। किसानों को बताया गया है कि यह चारा संरक्षण का सबसे सस्ता और सरल उपाय है। किसी भी प्रकार की तकनीकी सहायता के लिए किसान नजदीकी कृषि महाविद्यालय या पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।

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