आदिवासी क्षेत्रों में प्रशासनिक फेरबदल का विरोध: बीजापुर में सर्व आदिवासी समाज ने खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

बीजापुर। सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने आदिवासी विकासखंडों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (सीईओ) की स्थापना एवं प्रशासनिक नियंत्रण को आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग से हटाकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग नवा रायपुर के पत्र क्रमांक F-No ESTB-102(2)/206/2026-GAD-4, दिनांक 27 फरवरी 2026 के संदर्भ में यह प्रस्ताव सामने आया है। सर्व आदिवासी समाज ने इसे आदिवासी हितों के विपरीत बताते हुए कहा कि संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। आदिम जाति विकास विभाग विशेष रूप से आदिवासी समाज के संरक्षण और विकास के लिए गठित है, ऐसे में प्रशासनिक नियंत्रण बदलने से विभाग की भूमिका और प्रभाव कमजोर हो जाएगा।
समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों में पेसा कानून लागू है और इन क्षेत्रों के विकासखंडों के सीईओ का आदिम जाति विकास विभाग के अधीन होना ग्राम सभाओं के सशक्तिकरण और बेहतर समन्वय के लिए आवश्यक है। यदि प्रशासनिक नियंत्रण बदला जाता है तो इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में जटिलताएं बढ़ेंगी और आदिवासी क्षेत्रों के विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि आदिवासी विकासखंडों की भौगोलिक और सांस्कृतिक परिस्थितियां सामान्य क्षेत्रों से अलग होती हैं, जिन्हें आदिम जाति विकास विभाग बेहतर तरीके से समझता है। यदि इसे पंचायत विभाग में विलय किया जाता है तो ट्राइबल सब प्लान की योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही विभाग में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा शर्तों तथा वरिष्ठता पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
सर्व आदिवासी समाज बीजापुर ने शासन से मांग की है कि आदिवासी विकासखंडों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों के प्रशासनिक नियंत्रण को किसी भी स्थिति में अन्य विभाग को हस्तांतरित न किया जाए और इसे पूर्व की तरह आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के अधीन ही रखा जाए। समाज ने चेतावनी दी कि यदि इस मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो पूरे राज्य में चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान सर्व आदिवासी समाज के जिला सचिव कमलेश्वर सिंह पैंकरा, गोंड समाज के जिला अध्यक्ष कामेश्वर दुब्बा, सर्व आदिवासी समाज के ब्लॉक अध्यक्ष पांडुराम तेलम, गोंडवाना समन्वय समिति के अध्यक्ष अमित कोरसा, परधान समाज के श्रवण सैंड्रा, बलराम वेंजम, शांतनु नूरेटी, लक्ष्मण कड़ती सहित अन्य सामाजिक पदाधिकारी मौजूद थे।
इससे पूर्व गोंडवाना भवन में आयोजित बैठक में समाज प्रमुखों ने 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस दोपहर 1 बजे गोंडवाना भवन प्रांगण में मनाने का निर्णय लिया। साथ ही अधिकारी-कर्मचारी प्रभाग के गठन को लेकर भी चर्चा की गई। बैठक में होली की शाम आदिवासी युवक सतीश मांडवी के साथ पुलिस द्वारा की गई कथित मारपीट की घटना की निंदा करते हुए शासन-प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई। समाज प्रमुखों ने कहा कि सतीश मांडवी एक राजनीतिक दल के जिला प्रमुख के रूप में कार्य कर चुके हैं, इसके बावजूद उन पर पुलिसिया कार्रवाई होना बीजापुर की आदिवासी जनता के प्रति पुलिस प्रशासन की नकारात्मक मानसिकता को दर्शाता है।

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