रायपुर जिले में एक प्रशासनिक निर्णय ने 35 से 40 कार्यालय प्रमुखों को आर्थिक असमंजस में डाल दिया है। जानकारी के मुताबिक कलेक्टर के मौखिक निर्देश के बाद जिला कोषालय अधिकारी ने इन अधिकारियों और कई कर्मचारियों का फरवरी माह का वेतन रोक दिया है। त्योहार के ठीक पहले वेतन अटकने से प्रभावित अधिकारी, कर्मचारी और उनके परिवार मानसिक व आर्थिक दबाव झेल रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार कई कार्यालयों में डीडीओ (Drawing and Disbursing Officer) की अस्थायी व्यवस्था 28 फरवरी तक ही मान्य थी। प्रत्येक वर्ष महालेखाकार कार्यालय द्वारा नए वित्तीय वर्ष के लिए डीडीओ का निरंतरता प्रमाण पत्र (Continuation Order) जारी किया जाता है। इसी प्रक्रिया के बीच फरवरी 2026 का वेतन बिल फंस गया।
बताया गया है कि डीडीओ कोड 1131035 के अंतर्गत यूनिट 999 में फरवरी 2026 का पृथक वेतन देयक 28 फरवरी को ही जिला कोषालय में जमा कर दिया गया था, जिसे उसी दिन पारित किया जाना अनिवार्य था। हालांकि अब तक बिल पास नहीं हुआ है।

वेतन अटकने से आयकर कटौती की प्रक्रिया भी प्रभावित होगी, जिससे संबंधित अधिकारियों को टैक्स फाइलिंग में अनावश्यक जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। प्रभावित अधिकारियों का कहना है कि वे नियमों के तहत प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं, फिर भी वेतन रोका जाना उचित नहीं है। उनका सवाल है—क्या त्योहार के समय सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को समय पर वेतन पाने का अधिकार नहीं हैं ? मामला अब प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।