ईरान और अमेरिका के बीच जारी अस्थिर शांति के बीच रूस ने मध्यस्थता की पेशकश की है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत के दौरान मिडिल ईस्ट में शांति बहाली के लिए सहयोग देने की इच्छा जताई है। क्रेमलिन के अनुसार, पुतिन ने विवाद के राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित की जा सके।
इससे पहले पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच हुई 21 घंटे की लंबी वार्ता बेनतीजा रही। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को अंतिम प्रस्ताव देने की बात कहकर पाकिस्तान से वापसी कर ली है। दूसरी ओर, ईरान के संसद अध्यक्ष कालिबाफ का कहना है कि अमेरिका उनका भरोसा जीतने में विफल रहा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि दोनों देशों के बीच हुआ युद्धविराम फिलहाल बरकरार है और किसी भी तरफ से कोई नया हमला नहीं हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता पूरी तरह विफल होती है और संघर्ष दोबारा शुरू होता है, तो इसका गहरा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा। खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस ठिकानों पर खतरे के कारण ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं। रूस ने इस मामले में अमेरिका के रुख की आलोचना करते हुए इसे अमानवीय बताया है। गौरतलब है कि जून 2025 में भी रूस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवादों को बातचीत से सुलझाने की वकालत की थी। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या रूस की यह पहल इस नाजुक शांति को स्थायी समाधान में बदल पाएगी।
