श्री शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन, रुद्राक्ष महिमा और नारद मोह

कोरिया, सोनहत। श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन विशाल भव्यता के साथ कोरिया जिले के सोनहत क्षेत्र में चल रहा है। कथा के दूसरे दिन आज श्री धाम वृंदावन से पधारे विख्यात कथावाचक आचार्य विनायकांत त्रिपाठी ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। दूसरे दिन की कथा का विषय ‘शिवनैवेध रुद्राक्ष महिमा’ एवं ‘नारद मोह’ पर केंद्रित रहा। आचार्य विनायकांत त्रिपाठी ने अपने अत्यंत प्रभावी एवं ओजपूर्ण वाचन शैली से उपस्थित जनसमुदाय को मंत्रमुग्ध कर दिया।

रुद्राक्ष की महिमा और नारद मोह की कथा

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में आचार्य श्री त्रिपाठी ने रुद्राक्ष की उत्पत्ति और उसके धारण करने के फलों का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान शिव का शरीर रुद्राक्ष के रूप में अवतरित हुआ है, इसलिए इसे धारण करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता और सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं।

इसके पश्चात उन्होंने ‘नारद मोह’ की लोकप्रिय कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान विष्णु के द्वारा माया विश्वमोह का निर्माण किया गया और कैसे देवर्षि नारद भी इस माया से अछूते नहीं रहे। आचार्य ने इस कथा के माध्यम से संसार की नश्वरता और माया से ऊपर उठकर भक्ति मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

कथा के दौरान महिला एवं पुरुष श्रद्धालु भाव विभोर होकर भजनों पर नृत्य करते नजर आए। सोनहत क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों से भी बड़ी संख्या में भक्तजन कथा श्रवण करने पहुंचे हैं। कथा स्थल पर भंडारे का भी आयोजन किया गया है, जहां सैकड़ों भक्तजनों ने प्रसाद ग्रहण किया।

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