ओहियो। कामकाजी महिलाओं के अधिकारों और कार्यस्थल पर संवेदनशीलता को लेकर अमेरिका से एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। ओहियो की एक कंपनी को अपनी कर्मचारी की वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) की उचित मांग ठुकराना बेहद महंगा पड़ा है। अदालत ने इस लापरवाही के कारण एक नवजात की मौत का जिम्मेदार मानते हुए कंपनी पर 22.5 मिलियन डॉलर (लगभग 180 करोड़ रुपये) का हर्जाना लगाया है।
मामला साल 2021 का है, जब चेल्सी वॉल्श नामक महिला एक निजी कंपनी में कार्यरत थीं। गर्भावस्था के दौरान उनकी स्थिति काफी नाजुक थी और डॉक्टरों ने उन्हें पूर्ण विश्राम के साथ घर से काम करने की सलाह दी थी। चेल्सी ने अपनी सेहत और नौकरी के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए कंपनी से वर्क फ्रॉम होम की अनुमति मांगी थी।
परिजनों द्वारा दर्ज शिकायत के अनुसार, कंपनी ने उनकी इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया था। चेल्सी को विकल्प दिया गया था कि या तो वह कार्यालय आकर काम करें या फिर बिना वेतन के अवकाश लें। आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य बीमा खोने के डर से चेल्सी को डॉक्टर की सलाह के विपरीत दफ्तर जाना पड़ा। लगातार तीन दिन कार्यालय में काम करने के बाद उन्हें अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और उन्होंने समय से पहले एक बच्ची को जन्म दिया, जिसकी कुछ ही घंटों बाद मृत्यु हो गई।
हैरान करने वाली बात यह रही कि जिस दिन चेल्सी को प्रसव पीड़ा हुई, कंपनी ने उसी दिन उनके वर्क फ्रॉम होम के अनुरोध को मंजूरी दी थी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस दुखद घटना के बाद परिवार ने कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया।
अदालत में सुनवाई के दौरान जूरी ने माना कि कंपनी ने एक कर्मचारी की वाजिब जरूरत को नजरअंदाज किया, जिससे एक जीवन का अंत हो गया। जूरी ने कंपनी को दोषी करार देते हुए भारी जुर्माना भरने का आदेश दिया। यह फैसला दुनिया भर की कंपनियों के लिए एक बड़ी सीख माना जा रहा है कि काम के दबाव के बीच कर्मचारियों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं की सेहत और सुरक्षा को प्राथमिकता देना कानूनी और नैतिक रूप से अनिवार्य है।