गरियाबंद छत्तीसगढ़ के प्रयाग राजिम में आगामी 1 फरवरी से शुरू होने वाले आस्था के सबसे बड़े केंद्र ‘राजिम कुंभ कल्प’ की गरिमा इस बार प्रशासन की लेटलतीफी और अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। मेले के आगाज में अब महज 144 घंटे (6 दिन) का समय शेष है, लेकिन मेला स्थल पर पसरा सन्नाटा और बिखरा हुआ सामान जिला प्रशासन के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। शनिवार को जब पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल और स्थानीय विधायक रोहित साहू ने औचक निरीक्षण किया, तो वहां की बदहाली देखकर उनका पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
इवेंट एजेंसी की लापरवाही पर मंत्री सख्त
निरीक्षण के दौरान मेला स्थल की स्थिति देखकर पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने मौके पर मौजूद इवेंट एजेंसी के प्रतिनिधियों को दो टूक कहा कि कुंभ की भव्यता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय के भीतर काम पूरा नहीं हुआ, तो एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। विधायक रोहित साहू ने भी स्थानीय जनभावनाओं का हवाला देते हुए कहा कि तैयारियां जमीनी स्तर पर कहीं नजर नहीं आ रही हैं।
कलेक्टर और सीईओ ने लगाई जमकर फटकार
व्यवस्थाओं की सुस्ती देख जिला कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ ने भी मोर्चा संभाला। अधिकारियों ने इवेंट मैनेजमेंट टीम को मौके पर ही जमकर फटकार लगाई। दरअसल, मुख्य मंच, बुनियादी सुविधाएं और श्रद्धालुओं के ठहरने के इंतजामों में हो रही देरी ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। प्रशासन का तर्क है कि वे समय पर लक्ष्य पूरा कर लेंगे, लेकिन जानकार इसे नही मान रहे हैं।
मीना बाजार दावों की हवा निकली, जनता पर महंगाई का बोझ
इस बार मेले का सबसे विवादास्पद पहलू ‘मीना बाजार’ बनकर उभरा है। पूर्व में शासन ने निजी भूमि (बस स्टैंड के समीप) से आयोजन को हटाकर सरकारी जमीन पर इस दावे के साथ शिफ्ट किया था कि इससे लागत कम होगी और आम जनता को सस्ता मनोरंजन मिलेगा। लेकिन हकीकत इसके उलट है।
बोली का पेच मीना बाजार की पहली बोली लगाने वाले ने राशि जमा नहीं की।
अपूर्ण प्रक्रिया दूसरे नंबर के बोलीदाता को काम दिया गया, पर उन्होंने भी अब तक राशि जमा नहीं की है।महंगे झूले अत्यधिक दर पर ठेका दिए जाने के कारण इस बार झूलों और अन्य मनोरंजन सेवाओं के दाम आसमान छूने की आशंका है।
प्रशासन के दावों पर उठ रहे सवाल
प्रशासनिक अधिकारियों ने दावा किया था कि सरकारी जमीन पर आयोजन से जनता को लाभ होगा, लेकिन वर्तमान स्थितियां इन दावों को खोखला साबित कर रही हैं। न तो समय पर टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो पा रही है और न ही बुनियादी ढांचे का काम पूरा हुआ है। मेले की शुरुआत में गिने-चुने दिन बचे हैं, ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है।
सांस्कृतिक धरोहर पर लापरवाही का साया
राजिम कुंभ कल्प छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था इस मेले से जुड़ी है। ऐसे में अंतिम समय की भागदौड़ और अफरा-तफरी से आयोजन की भव्यता पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि मंत्री की फटकार के बाद प्रशासन में कोई हलचल होती है या कुंभ का यह आयोजन बदइंतजामी की भेंट चढ़ जाता हैं