रायपुर का ‘स्काई वॉक’: 8 महीने का वादा, 10 महीने बाद भी सिर्फ ढांचा

रायपुर | मार्च 2026छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने और पैदल यात्रियों को सुगम रास्ता देने के लिए बनाया जा रहा ‘महत्वाकांक्षी स्काई वॉक प्रोजेक्ट’ खुद अपनी ही डेडलाइन के नीचे दब गया है। 8 महीने में काम पूरा करने का सरकारी दावा पूरी तरह फेल साबित हुआ है। आज 10 महीने बीत जाने के बाद भी यह प्रोजेक्ट अधूरा है, जिससे जनता में भारी नाराजगी है।प्रमुख बिंदु: क्यों अटक गया ‘स्काई वॉक’?डेडलाइन पार, काम अधूरा: दावा 8 महीने का था

लेकिन 10 महीने बाद भी कई जगहों पर सिर्फ पिलर और लोहे के ढांचे ही दिखाई दे रहे हैं।रात का सहारा, फिर भी सुस्ती: ट्रैफिक दबाव के कारण दिन में काम बंद रहता है। रात 10 बजे के बाद निर्माण शुरू होता है, लेकिन रात की यह शिफ्ट भी प्रोजेक्ट की रफ्तार बढ़ाने में नाकाम रही है।कनेक्टिविटी का इंतजार: डीकेएस अस्पताल से अंबेडकर अस्पताल को जोड़ने वाला यह मार्ग कलेक्ट्रेट और शास्त्री चौक जैसे व्यस्त इलाकों के लिए लाइफलाइन है, जो फिलहाल अधर में है।प्रोजेक्ट का विजन बनाम जमीनी हकीकतयोजनावर्तमान स्थितिरूटडीकेएस से अंबेडकर अस्पताल तक।सुविधातहसील और कलेक्ट्रेट ऑफिस की सीधी पहुंच।ट्रैफिकमल्टीलेवल पार्किंग से कनेक्टिविटी।अफसरों का वही पुराना राग: “जल्द होगा पूरा”निर्माण में हो रही देरी पर अधिकारियों का तर्क है कि भारी ट्रैफिक और तकनीकी पेच की वजह से समय लगा है। हालांकि, अब काम में तेजी लाने की बात कही जा रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या रायपुर की जनता को इस मानसून से पहले अपना स्काई वॉक मिल पाएगा या उन्हें धूल और जाम के बीच ही सफर करना होगा?जनता का सवाल: “अगर प्लानिंग पक्की थी, तो 10 महीनों में भी ढांचा पूरा क्यों नहीं हुआ? क्या रात की शिफ्ट सिर्फ दिखावा है?”

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