रायपुर। छत्तीसगढ़ के कथित 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने निलंबित राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी ने उन्हें मंगलवार को लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया तथा बुधवार को आगे की पूछताछ के लिए रिमांड पर लेने हेतु विशेष अदालत में पेश किया।
सौम्या चौरसिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव रह चुकी हैं तथा कोयला घोटाला मामले में भी मुख्य आरोपियों में शामिल रही हैं। मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट की शर्तों पर उन्हें अन्य आरोपियों के साथ रिहा किया गया था, जिसमें राज्य से बाहर रहने के निर्देश शामिल थे।
शराब घोटाले की बात करें तो कांग्रेस शासनकाल (2019-2023) के दौरान शराब नीति में बदलाव कर चहेते सप्लायरों को लाभ पहुंचाया गया। लाइसेंस शर्तें ऐसी रखी गईं कि चुनिंदा कंपनियों को काम मिल सके। इन कंपनियों ने नकली होलोग्राम एवं सील बनवाई, जिसका काम नोएडा की एक कंपनी ने किया। नकली होलोग्राम वाली महंगी शराब की बोतलें सरकारी दुकानों से बेची गईं।
नकली होलोग्राम के कारण बिक्री की जानकारी सरकार को नहीं मिलती थी तथा बिना आबकारी कर चुकाए शराब बेची जाती रही। इससे सरकार को 2165 करोड़ रुपये से अधिक के कर का नुकसान हुआ। यह राशि कांग्रेस भवन निर्माण से लेकर नेताओं, अधिकारियों एवं मंत्रियों तक वितरित की गई।
इस मामले में अब तक पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा तथा एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसके अलावा आबकारी विभाग के 28 अधिकारियों को आरोपी बनाया गया था, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। जांच जारी है।