रायगढ़। सीएसआर मद से एनजीओ को फंड दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपए की साइबर धोखाधड़ी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के पांच सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह गिरोह टेलीग्राम के माध्यम से साइबर ठगों को कॉर्पोरेट बैंक खाते उपलब्ध कराता था और ठगी की रकम पर 5 से 15 प्रतिशत तक कमीशन लेता था। जांच में पता चला है कि इन आरोपियों के खिलाफ देशभर में साइबर अपराध की 44 शिकायतें दर्ज हैं।
धोखाधड़ी का यह मामला तब सामने आया जब रायगढ़ के इंदिरानगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता आयशा परवीन ने साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पीड़िता ने बताया कि आरोपियों ने उनकी एनजीओ को कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व यानी सीएसआर फंड दिलाने का झांसा दिया था। आरोपियों के भरोसे में आकर महिला ने एक निजी बैंक में खाता खुलवाया, जिसका पूरा नियंत्रण आरोपियों ने अपने पास ले लिया। इसके बाद पीड़िता और उसके पति को नौकरी व अनुदान का लालच देकर गुवाहाटी बुलाया गया। वहां एक होटल में रखकर उनके मोबाइल में संदिग्ध एपीके फाइल डाउनलोड की गई और उनके बैंक खाते के जरिए करीब 2 करोड़ 17 लाख रुपए का अवैध लेनदेन किया गया।
रायगढ़ लौटने पर बैंक से संदिग्ध ट्रांजैक्शन की सूचना मिलने के बाद महिला को ठगी का अहसास हुआ। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि गिरफ्तार आरोपी अभय यादव, जो पहले बैंक में काम कर चुका है, अपने साथियों विजय चंद्रा, अजय साहू, मितेश और सचिन चौहान के साथ मिलकर इस सिंडिकेट को चला रहा था। ये लोग भोले-भाले लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें बड़े साइबर अपराधियों को किराए पर देते थे।
पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि इस गिरोह ने महिला के खाते का उपयोग दिसंबर 2025 से ही संदिग्ध लेनदेन के लिए शुरू कर दिया था। रायगढ़ साइबर पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों और अन्य राज्यों में दर्ज मामलों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।