रायपुर : अंधेरे में काल बना खुला गड्ढा राजधानी रायपुर के हीरापुर इलाके से लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की रूह कंपा देने वाली लापरवाही सामने आई है। यहाँ निर्माणाधीन ओवरब्रिज के लिए खोदे गए एक गहरे गड्ढे ने एक मासूम युवक की जिंदगी निगल ली। रविवार देर रात बिहार निवासी मुना कुमार अपनी ड्यूटी पर जा रहा था। सड़क पर लाइट नहीं होने और गड्ढे के चारों ओर कोई सुरक्षा घेरा न होने की वजह से वह सीधे 20 फीट गहरे मौत के जाल में जा गिरा। गड्ढे में पानी भरा होने और सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण युवक को संभलने तक का मौका नहीं मिला और मौके पर ही उसकी सांसें थम गईं।
न बैरिकेडिंग, न रेडियम: नियमों की उड़ी धज्जियां हैरानी की बात यह है कि नियमों के मुताबिक, निर्माण स्थल पर मजबूत बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड और पर्याप्त रोशनी होनी अनिवार्य है। लेकिन हीरापुर की इस साइट पर ठेकेदार ने सुरक्षा के नाम पर एक पत्थर तक नहीं लगाया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गड्ढा कई दिनों से इसी तरह ‘खुली मौत’ बनकर राहगीरों का इंतजार कर रहा था। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों और ठेकेदार की इस सुस्ती ने एक कामकाजी युवक के परिवार को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया है।
मौत के बाद जागी व्यवस्था, अब भी खतरा बरकरार हादसे की खबर फैलते ही इलाके में भारी आक्रोश देखा गया। सुबह जब पुलिस ने शव को बाहर निकाला, तब जाकर विभाग की नींद टूटी। मजे की बात यह है कि युवक की मौत के बाद ठेकेदार ने आनन-फानन में गड्ढे के पास कुछ जालीनुमा बैरिकेडिंग की है, जो इतनी कमजोर है कि किसी भी वक्त दूसरा हादसा हो सकता है। वहां अब भी मवेशी और लोग खतरा मोल लेकर गुजर रहे हैं। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है, लेकिन सवाल वही है कि इस मौत का जिम्मेदार कौन है?
परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा युवक मुना कुमार एक निजी कंपनी में काम करता था और अपने परिवार का सहारा था। उसकी मौत के बाद स्थानीय लोगों ने पीडब्ल्यूडी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते चेतावनी संकेत या जाली लगा दी गई होती, तो आज मुना जिंदा होता। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करता है या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।