जनपद प्रतिनिधि व आदिवासी समाज ने भानुप्रतापपुर–पखांजूर मार्ग किया जाम
कांकेर। जनपद पंचायत दुर्गूकोंदल क्षेत्र में प्रस्तावित बस्तर पांडुम कार्यक्रम को बिना पूर्व सूचना के स्थगित किए जाने से जनपद पंचायत प्रतिनिधियों एवं आदिवासी समाज में भारी नाराजगी देखी गई। आक्रोशित जनपद प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आदिवासी समाज के लोगों ने भानुप्रतापपुर–पखांजूर मुख्य मार्ग को जाम कर शासन और प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दिनांक 16 जनवरी 2026 को बस्तर पांडुम का आयोजन प्रस्तावित था, जिसे कलेक्टर के हवाले से जनपद पंचायत द्वारा स्थगित किए जाने की सूचना सामने आई। इस निर्णय को लेकर सबसे अधिक नाराजगी इस बात पर जताई गई कि जनपद पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं किसी भी निर्वाचित जनपद सदस्य को इसकी पूर्व सूचना तक नहीं दी गई। जनप्रतिनिधियों ने इसे जनप्रतिनिधियों और आदिवासी समाज दोनों का अपमान बताया।
आदिवासी संस्कृति से जुड़ा आयोजन, अचानक रद्द करना अस्वीकार्य
सड़क जाम के दौरान जनपद पंचायत अध्यक्ष गोपी बढ़ाई, उपाध्यक्ष आनंद तेता, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष धनेश नरेटी सहित अन्य जनपद सदस्यों ने शासन पर गंभीर आरोप लगाए। वक्ताओं ने कहा कि बस्तर पांडुम आदिवासी संस्कृति, परंपरा और पहचान से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन है, जिसे बिना कारण और बिना सूचना के स्थगित करना आदिवासी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आदिवासियों के नाम पर योजनाएं तो बनाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर न तो उन्हें सम्मान दिया जा रहा है और न ही जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिया जा रहा है।
प्रशासन पर मनमानी का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन मनमर्जी से निर्णय ले रहा है और जनपद पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों से न तो परामर्श किया जाता है और न ही उन्हें सूचना दी जाती है। इसी उपेक्षा के कारण जनप्रतिनिधियों को सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
कई जनपद सदस्य व सामाजिक कार्यकर्ता रहे शामिल
सड़क जाम प्रदर्शन में जनपद सदस्य हेमलता ऊईके, सुलोचना कोरेटी, निर्मला कोवाची, सियाराम पोटाई, दीनदयाल पटेल, सुखचंद प्रजापति, जीवन ऊईके, रजमन कोवाची, सोमदेव कोरेटी, हरीश रावटे, परमेश्वर बघेल, नंदलाल नेताम, जीत नाग, लतिफ ध्रुव, महत्तम दुग्गा, सियाराम दरो, अनूप दीवान, घनश्याम ठाकुर सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता एवं कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि इस तरह से जनप्रतिनिधियों और आदिवासी समाज की अनदेखी की गई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।