छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में बढ़ते नशीले पदार्थों के कारोबार और तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में विशेष अभियान समूह (SOG) और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के गठन को मंजूरी दी गई है। सरकार का कहना है कि इन विशेष इकाइयों के जरिए नशे के नेटवर्क को तोड़ने और तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को और तेज किया जाएगा।

राज्य सरकार के अनुसार, नशीले पदार्थों की तस्करी केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि यह युवाओं के भविष्य और समाज की स्थिरता के लिए भी गंभीर चुनौती बनती जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस तंत्र को मजबूत करने और नशामुक्त समाज की दिशा में यह रणनीतिक कदम उठाया गया है।
राज्य में बढ़ती चुनौती
पिछले कुछ वर्षों में देश के अन्य हिस्सों की तरह छत्तीसगढ़ में भी गांजा, अफीम, हेरोइन, ब्राउन शुगर और सिंथेटिक ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों की तस्करी की घटनाएं सामने आई हैं। विभिन्न सर्वेक्षणों के अनुसार प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग नशे की लत का शिकार हो रहे हैं, जिसमें युवाओं और किशोरों की संख्या भी चिंता बढ़ाने वाली है।

अनुमान है कि राज्य में करीब 1.5 से 2 लाख लोग अफीम और इंजेक्टेबल ड्रग्स का सेवन करते हैं, जबकि लगभग 3.8 से 4 लाख लोग गांजा का उपयोग करते हैं। वहीं 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के हजारों किशोर इनहेलेंट और कफ सिरप जैसे नशीले पदार्थों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
अभियान में बढ़ी कार्रवाई
सरकार का दावा है कि नशे के खिलाफ अभियान के तहत पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। पिछले 13 महीनों में 1,434 मामले दर्ज किए गए और 2,599 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान करीब 20,089 किलोग्राम गांजा और तीन लाख से अधिक नशीली गोलियां व कैप्सूल जब्त किए गए।
साल 2025 में भी मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई तेज रही। इस दौरान 1,288 मामले दर्ज किए गए और 2,342 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बड़ी मात्रा में गांजा, अफीम, हेरोइन, ब्राउन शुगर, चरस और अन्य नशीले पदार्थ बरामद किए।
वहीं 2026 की शुरुआत में भी अभियान जारी है। 31 जनवरी तक 146 मामलों में 257 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और हजारों किलो गांजा सहित अन्य मादक पदार्थ जब्त किए गए।
SOG और ANTF की भूमिका
राज्य सरकार ने अब संगठित अपराध और नशे के नेटवर्क से निपटने के लिए नई संस्थागत व्यवस्था तैयार की है। पुलिस मुख्यालय के अंतर्गत बनने वाला SOG आतंकवादी गतिविधियों, संगठित अपराध और अचानक उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा। इस इकाई को आधुनिक तकनीक और विशेष प्रशिक्षण से लैस किया जाएगा।
इसके अलावा 10 जिलों में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स गठित की जाएगी। इसके लिए 100 नए पदों को मंजूरी दी गई है। यह टास्क फोर्स खुफिया जानकारी जुटाने, तस्करी के नेटवर्क का पता लगाने और अन्य राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।
आर्थिक नेटवर्क पर भी कार्रवाई
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नशे के कारोबार से जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर भी कार्रवाई की जाएगी। एनडीपीएस अधिनियम के तहत वित्तीय जांच को प्राथमिकता दी जा रही है। वर्ष 2025 में 16 आरोपियों की करीब 13.29 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या फ्रीज की गई, जबकि कई आदतन अपराधियों के खिलाफ PIT-NDPS कानून के तहत कार्रवाई की गई।
जागरूकता अभियान भी जारी
सरकार का कहना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए समाज में जागरूकता भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। साथ ही “मानस” नाम से 1933 टोल-फ्री हेल्पलाइन भी शुरू की गई है, जहां लोग नशीले पदार्थों से जुड़ी गतिविधियों की सूचना दे सकते हैं।
सरकार का कहना है कि युवाओं को नशे से दूर रखना उसकी प्राथमिकता है और इसके लिए प्रशासनिक कार्रवाई के साथ सामाजिक भागीदारी भी आवश्यक है।