छत्तीसगढ़ में सियासी संग्राम तेज: एक्साइज ड्यूटी और नक्सलवाद पर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में पेट्रोल-डीजल, आबकारी, नक्सलवाद और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी जारी है। दीपक बैज ने जहां भाजपा सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए, वहीं मंत्री गजेंद्र यादव ने पलटवार करते हुए सरकार के फैसलों का बचाव किया।

एक्साइज ड्यूटी पर सियासत तेज
पीसीसी चीफ दीपक बैज ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने के फैसले को “दिखावटी” बताते हुए कहा कि इससे आम जनता को कोई राहत नहीं मिली है। उनके मुताबिक कीमतें अब भी पहले जैसी ही बनी हुई हैं और इसका फायदा सिर्फ तेल कंपनियों को हो रहा है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मंत्री “बरसाती मेंढकों” की तरह बाहर आकर फैसले की तारीफ कर रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत अलग है।

वहीं मंत्री गजेंद्र यादव ने जवाब देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने पहली बार इस तरह की कमी की है और आने वाले समय में इसका लाभ जनता तक पहुंचेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राज्य सरकार पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले सेस में कटौती पर विचार कर सकती है।

नक्सलवाद पर भी टकराव
नक्सल मुद्दे पर भी दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। बैज ने कहा कि सरकार 31 मार्च की समयसीमा तय कर रही है, लेकिन बाद में बहाने बना सकती है। उन्होंने निर्दोष आदिवासियों को परेशान न करने और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा की बात कही।

इसके जवाब में गजेंद्र यादव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब उनकी सरकार थी, तब नक्सलियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता था। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार के दौरान कई बड़े नक्सली मारे गए, कुछ ने आत्मसमर्पण किया और प्रदेश विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में इन मुद्दों को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता नजर आ रहा है। एक तरफ विपक्ष सरकार को घेरने में जुटा है, तो वहीं सत्तापक्ष अपने फैसलों को जनहित में बताते हुए जवाब दे रहा है। आने वाले दिनों में यह टकराव और बढ़ सकता है, जिससे प्रदेश की राजनीति और गरमाने के आसार हैं।

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