कोरिया, 02 फरवरी, 2026/ ग्रामीण अंचलों में परंपरागत जलस्रोतों का संरक्षण एवं उन्नयन स्थानीय आजीविका सशक्तिकरण का मजबूत आधार बन सकता है। इसका एक उदाहरण कोरिया जिले के सोनहत जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम गोयनी स्थित पटेलपारा तालाब है, जो महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत गहरीकरण एवं जीर्णोद्धार के बाद अब 20 आदिवासी परिवारों के लिए खुशहाली और।आत्मनिर्भरता का माध्यम बन गया है।
वर्षों से उपेक्षित यह तालाब अब पर्याप्त जलसंचय के साथ ग्रामीणों की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहा है। साथ ही आसपास के किसानों की 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि में खरीफ एवं रबी दोनों मौसमों की फसलों की सिंचाई संभव हो पाई है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

पूर्व की स्थिति
ग्रामीणों के अनुसार, पटेलपारा तालाब कभी क्षेत्र का समृद्ध जलस्रोत हुआ करता था। समय के साथ इसमें गाद जमाव एवं खरपतवार बढ़ने से इसकी जलधारण क्षमता घटती चली गई। हालात यह हो गए थे कि वर्षा ऋतु के बाद सर्दी के प्रारंभ तक तालाब लगभग सूख जाता था और ग्रामीणों को दैनिक निस्तार तक के लिए जल संकट का सामना करना पड़ता था।
मनरेगा से बदली तस्वीर
ग्रामीणों द्वारा ग्राम पंचायत में तालाब जीर्णोद्धार का प्रस्ताव रखा गया। ग्राम सभा से अनुमोदन के पश्चात महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत लगभग 10 लाख रुपये की लागत से तालाब के गहरीकरण एवं पिचिंग कार्य को स्वीकृति दी गई। ग्राम पंचायत को कार्यकारी एजेंसी बनाते हुए मई 2025 में कार्य प्रारंभ किया गया, जो सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ।

जीर्णोद्धार के बाद पटेलपारा तालाब में वर्षा काल के दौरान लगभग 10,000 घनमीटर जल संग्रहण संभव हो गया है। इससे पटेलपारा के लगभग 20 परिवारों को दैनिक उपयोग हेतु जल उपलब्ध हो रहा है, वहीं आधा दर्जन किसानों की 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिली है।
बहुफसलीय खेती से बढ़ी आय
पटेलपारा निवासी किसान श्री रामदास सिंह, श्री जमुना प्रसाद, श्री उदय भान सिंह एवं श्री रामरक्षा सिंह की भूमि पर अब धान के साथ-साथ गेहूं, सरसों, मक्का एवं सब्जियों की खेती की जा रही है। बहुफसलीय उत्पादन से इन आदिवासी परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है और आजीविका के नए अवसर सृजित हुए हैं।
स./मानिकपुरी