भोपाल। मध्यप्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। पंचायत प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रदेश के 14 जिलों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 16,773 परियोजना कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। योजना में बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, नरसिंहपुर, सागर, छतरपुर, सीधी, पूर्वी निमाड़, हरदा, नीमच, गुना और झाबुआ शामिल हैं।
पंचायती राज संस्थाओं के डिजिटलीकरण और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए ई-गवर्नेंस पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पंद्रहवें वित्त आयोग के तहत पंचायतों को मिलने वाले अनुदान को दो हिस्सों, टाइड और अनटाइड ग्रांट में बांटा गया है। अनटाइड ग्रांट का उपयोग स्थानीय जरूरतों के लिए किया जाता है, जबकि टाइड ग्रांट का उपयोग स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और पेयजल आपूर्ति जैसे बुनियादी कार्यों के लिए अनिवार्य है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश की 99.85 प्रतिशत पंचायतों ने अपनी विकास योजनाओं को ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर अपलोड कर दिया है। इसके माध्यम से अब तक 2156.10 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान सीधे विक्रेताओं को किया जा चुका है।
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए प्रदेश के 9 लाख से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया गया है। इसके लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का सहयोग लिया गया है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पदाधिकारियों में नेतृत्व कौशल, वित्तीय प्रबंधन और निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करना है। साथ ही पंचायतों को स्वयं के राजस्व स्रोत जुटाने के लिए भी प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण विकास की प्रक्रिया सतत और पारदर्शी बनी रहे।