शेयर बाजार में हाहाकार: विदेशी निवेशकों ने मार्च में निकाले ₹88,180 करोड़, मिडिल ईस्ट के तनाव से सहमा बाजार

Share Market News : मुंबई। भारतीय शेयर बाजार के लिए मार्च 2026 का महीना किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हो रहा है। खाड़ी देशों (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते सैन्य संघर्ष और युद्ध के बादलों ने वैश्विक निवेशकों की नींद उड़ा दी है। इसका सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर देखने को मिल रहा है, जहाँ विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने इस हफ्ते रिकॉर्ड तोड़ बिकवाली की है।

हफ्ते भर का लेखा-जोखा: कब कितनी हुई निकासी?
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस सप्ताह विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से कुल 35,475 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि निकाल ली है।

सोमवार: ₹10,827 करोड़ की सबसे बड़ी बिकवाली।

मंगलवार और बुधवार: करीब ₹13,782 करोड़ बाजार से बाहर हुए।

शुक्रवार: गुड़ी पड़वा की छुट्टी के बाद बाजार खुलते ही ₹10,965 करोड़ के शेयर और बेचे गए।
मार्च महीने में अब तक की कुल निकासी ₹88,180 करोड़ तक जा पहुँची है, जो इस साल का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

बाजार में मची इस खलबली के पीछे के 3 बड़े कारण:

मिडिल ईस्ट में युद्ध का संकट: ईरान और अन्य देशों के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों को जोखिम कम करने पर मजबूर कर दिया है।

कच्चे तेल की आग: युद्ध की खबरों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई बढ़ने का डर है।

‘हॉट मनी’ का पलायन: FPIs को अक्सर ‘हॉट मनी’ कहा जाता है क्योंकि ये निवेशक अस्थिरता देखते ही अपना पैसा एक देश से निकाल कर सुरक्षित ठिकानों पर ले जाते हैं।

एक्सपर्ट की राय:
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में निवेशक ‘वेट एंड वॉच’ (इंतजार करो और देखो) की स्थिति में हैं। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर के मुताबिक, जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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