फर्जी बैंक खातों से ऑनलाइन बैटिंग गिरोह का भंडाफोड़, 3 मुख्य आरोपी गिरफ्तार

दुर्ग पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अब तक 19 आरोपी गिरफ्तार, करोड़ों के लेन-देन का खुलासा.. पढिए पूरी खबर..

रमेश गुप्ता भिलाई । ऑनलाइन बैटिंग और फर्जी बैंक खातों के जरिए अवैध लेन-देन करने वाले गिरोह पर दुर्ग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक कुल 19 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच में करोड़ों रुपए के लेन-देन का खुलासा हुआ है।
पत्रकार वार्ता में एडिशनल एसपी सुखनंदन राठौर और सीएसपी हर्षित मेहरा ने बताया कि प्रकरण की शुरुआत 31 दिसंबर 2025 को हुई थी, जब प्रार्थी अविनाश दुबे ने थाना पदमनाभपुर में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि आरोपियों द्वारा लोगों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाकर उनके एटीएम, सिम कार्ड, पासबुक और चेकबुक हासिल किए जाते थे। इन खातों का उपयोग विभिन्न ऑनलाइन बैटिंग ऐप्स में अवैध धन लेन-देन के लिए किया जाता था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि इन खातों से संबंधित सामग्री मुंबई भेजी जाती थी, जहां से संगठित तरीके से अवैध आर्थिक गतिविधियों को संचालित किया जा रहा था। तथा जिनके खाता लिया गया था उन्हें 20 हजार रुपए महीना देने के लिए बोला गया था l
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(4), 319(2) और टेलीकम्युनिकेशन एक्ट की धारा 42(2), 42(3) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की थी। पूर्व में 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था, वहीं अब सह-प्रमुख आरोपी कुश (28 वर्ष), रितेश राय (40 वर्ष) और महेंद्र सिंह ठाकुर (32 वर्ष) को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।
जप्त सामग्री में बड़ा खुलासा
आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने बड़ी मात्रा में बैंकिंग और तकनीकी सामग्री जब्त की है, जिनमें—
22 एटीएम कार्ड,10 चेक बुक
08 बैंक पासबुक,04 सिम कार्ड
05 मोबाइल फोन,एक नकली पिस्टल,एक रजिस्टर बरामद किया गया है l पुलिस ने बताया कि गिरोह सुनियोजित तरीके से फर्जी खातों का संचालन कर रहा था।
अवैध कमाई का संगठित नेटवर्क
जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि गिरोह का मुख्य उद्देश्य अवैध लाभ अर्जित करना था। इसके लिए यह लोग भोले-भाले लोगों के नाम पर खाते खुलवाकर उन्हें ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से जोड़ते थे और बड़े स्तर पर धन का ट्रांजैक्शन करते थे।
तकनीकी विश्लेषण से मिली सफलता
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी में तकनीकी विश्लेषण और लगातार निगरानी की अहम भूमिका रही। थाना पदमनाभपुर पुलिस टीम की सक्रियता और समन्वित प्रयासों से इस संगठित अपराध का पर्दाफाश संभव हो सका। पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है और मामले में आगे की जांच जारी है।

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