राजकुमार मल
भाटापारा- लोटपोट- हंसी और मस्ती की पाठशाला। बच्चों का हंसमुख साथी- सरस सलिल। नई पीढ़ी के निर्माण का रास्ता दिखाने वाला नंदन। बच्चों की संपूर्ण पत्रिका पराग। चाचा चौधरी आ तो रहे हैं लेकिन रिस्पांस नहीं मिल रहा है।
90 के दशक तक खूब चलीं बच्चों का मनोरंजन करने वाली यह मनोरंजक किताबें। प्रकाशन में हैं लेकिन हैंडबुक की बजाय यूट्यूब को ज्यादा पसंद किया जा रहा है, जहां पहले से ही ढेर सारी सामग्रियां हैं। ऐसी स्थितियों में बेताल, मैंड्रेक्स,लोथार, चाचा चौधरी, मोटू-पतलू और लंबू- छोटू जैसे पात्र यादों में सिमट चुके हैं।
शिखर पर थे पात्र
इंद्रजाल कॉमिक्स के पात्र बेताल, मेंड्रेक और लोथार के साहसिक कारनामे रोमांच पैदा करते थे, तो फुर्सत के पलों में चाचा चौधरी की चुहलबाजियां खूब लुभातीं थीं। गर्मी की छुट्टियां मोटू- पतलू और छोटू- लंबू के संग मनाना पसंद करते थे बच्चे। छोटी-छोटी कहानियां वाली मासिक किताबों में पराग, नंदन, सरस-सलिल और चंपक के लिए तो किताब दुकानों के पास पहले ही बुकिंग हो जाया करती थी।

किराए पर भी…
बच्चों के बीच इन किताबों और इन पात्रों की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निकायों द्वारा संचालित वाचनालयों में मासिक सदस्यता शुल्क लेकर यह किताबें उपलब्ध करवाने की सुविधा चालू की गई लेकिन बढ़ता रुझान देखकर निजी क्षेत्र में प्रतिदिन 10 से 25 पैसे प्रतिदिन के किराए पर देने की व्यवस्था सामने आई। बेहद सफल रही बच्चों के लिए यह व्यवस्था।
हैंडबुक नहीं, अब यू ट्यूब
बच्चों का मनोरंजन करने वाली यह सभी किताबें आ तो रहीं हैं लेकिन न पाठक रहे, ना बुक स्टॉल। ऐसा इसलिए क्योंकि मोबाइल क्रांति के दौर में यूट्यूब पर नजर आने लगे हैं ऐसी किताबें और महत्वपूर्ण तथा सदाबहार पात्र, जिनकी प्रतीक्षा महीने के दूसरे पखवाड़े से ही करते थे बच्चे। अब प्रतिक्षा कर रहे हैं चाचा चौधरी और मोटू पतलू…।
यूट्यूब पर ही
बच्चों का स्वस्थ मनोरंजन करने वाली यह सभी अब यूट्यूब पर उपलब्ध हैं। हैंडबुक का चलन नहीं के बराबर ही है।
- हिमांशु मिश्रा, श्री महावीर पुस्तकालय, बिलासपुर