नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को मिली जमानत के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अब अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत ने फिलहाल इस मामले को एक सप्ताह के लिए सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया भी शामिल हैं, के समक्ष छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि जमानत मिलने के बाद इस मामले का एक अहम गवाह सामने नहीं आ रहा है, जिससे जांच प्रभावित हो रही है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी धन शोधन से जुड़े एक अलग प्रकरण में चैतन्य बघेल की जमानत को चुनौती दी है।

राज्य सरकार ने चैतन्य को बताया साजिश का अहम किरदार
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 15 जनवरी को भी सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई स्थगित की थी। सरकार का कहना है कि चैतन्य बघेल इस कथित घोटाले में सिर्फ आरोपी ही नहीं, बल्कि पूरे षड्यंत्र के प्रमुख सूत्रधारों में शामिल रहे हैं। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने दलील दी कि उच्च न्यायालय ने दो वर्षों तक चली जांच के बाद तथ्यों के आधार पर संतुलित आदेश पारित किया था। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2 जनवरी को शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में चैतन्य बघेल को जमानत दी थी।
ईडी का दावा: 1000 करोड़ रुपये के निजी लेनदेन का आरोप
ईडी के मुताबिक, यह कथित शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब राज्य में कांग्रेस सरकार सत्ता में थी। एजेंसी का दावा है कि इस घोटाले से राज्य के राजस्व को भारी नुकसान हुआ और एक संगठित शराब सिंडिकेट को अवैध लाभ पहुंचाया गया। ईडी का यह भी आरोप है कि चैतन्य बघेल इस नेटवर्क के शीर्ष पर थे और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से लगभग 1,000 करोड़ रुपये के लेनदेन को अंजाम दिया।
सौम्या चौरसिया को हाई कोर्ट जाने की सलाह
इसी मामले से जुड़ी एक अन्य याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया को जमानत के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी। सौम्या को ईडी ने दिसंबर में शराब घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया था।
चौरसिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि उन्हें पहले भी अन्य मामलों में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, इसके बावजूद नई एफआईआर दर्ज कर बार-बार गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह छठी बार है जब सौम्या चौरसिया को हिरासत में लिया गया है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह एक सप्ताह के भीतर उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल कर सकती हैं और हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वह प्राथमिकता के आधार पर दो सप्ताह के भीतर इस पर निर्णय ले। अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि 2 जनवरी को सौम्या को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया था, जिस पर भी हाई कोर्ट में जमानत मांगी जा सकती है।
गौरतलब है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कोयला लेवी घोटाले से जुड़े एक मामले में सौम्या चौरसिया को राहत दी थी, लेकिन बाद में जांच एजेंसियों ने उन्हें शराब घोटाले से संबंधित मामलों में पुनः गिरफ्तार कर लिया।