​ अतिथि व्याख्याताओं पर एनईपी की मार: क्रेडिट सिस्टम के नाम पर मानदेय में भारी कटौती, आक्रोश

बिलासपुर/अकलतरी: नई शिक्षा नीति (NEP) जहाँ एक ओर शिक्षा में सुधार के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर महाविद्यालयों में अध्यापन करा रहे अतिथि व्याख्याताओं के लिए यह आर्थिक अभिशाप साबित हो रही है। गणित जैसे कठिन विषयों के सिलेबस और क्रेडिट सिस्टम की आड़ लेकर अतिथि व्याख्याताओं के कार्यदिवसों और कालखंडों (Periods) में कटौती की जा रही है, जिससे उनके सामने जीविकोपार्जन का संकट खड़ा हो गया है।
​यूनिट और क्रेडिट का गणित बना गले की फांस
अतिथि व्याख्याताओं का आरोप है कि प्रशासन द्वारा सिलेबस की 15 यूनिटों को आधार बनाकर अधिकतम 60 कालखंडों की सीमा तय की जा रही है। पहले भुगतान पीरियड और फिर घंटों के आधार पर होता था, लेकिन अब क्रेडिट सिस्टम के नाम पर इसे और भी सीमित कर दिया गया है। जानकारों का कहना है कि पीरियड के बीच में जानबूझकर गैप दिया जा रहा है ताकि कुल कार्य घंटों को कम दिखाया जा सके।
​दिसंबर में आर्थिक नुकसान
अतिथि व्याख्याताओं ने बताया कि दिसंबर के महीने में इस नई व्यवस्था के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि एक व्याख्याता को पर्याप्त कालखंड ही नहीं मिलेंगे, तो वह अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करेगा? अतिथि व्याख्याताओं ने शासन से मांग की है कि उन्हें ‘एकमुश्त वेतन’ दिया जाए और शिक्षण कार्य की गणना व्यावहारिक आधार पर की जाए, न कि केवल कागजी क्रेडिट के आधार पर।

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