नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में जनवरी 2026 में हुई हिंसा की एनआईए जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को जांच जारी रखने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट के इस निर्णय को पश्चिम बंगाल सरकार के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश पूरी तरह संतुलित है और राज्य सरकार अपनी आपत्तियां वहीं उठा सकती है। दरअसल, बंगाल सरकार ने हाई कोर्ट के 26 फरवरी के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने हिंसा की जांच एनआईए को सौंपने के निर्णय पर रोक लगाने से मना कर दिया था।
सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने जांच का बचाव किया। उन्होंने दलील दी कि हिंसा में घातक हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। साथ ही, बेलडांगा क्षेत्र बांग्लादेश सीमा के पास स्थित होने के कारण मामले की गंभीरता बढ़ जाती है, इसीलिए इसमें गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए को सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिसमें जांच में यूएपीए की धाराएं लगाने के कारणों का उल्लेख करने को कहा गया था। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को इस संवेदनशील मामले की जांच एनआईए को सौंपी थी। ज्ञात हो कि जनवरी में बेलडांगा इलाके में हुई हिंसक घटनाओं के बाद क्षेत्र में भारी अशांति और विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिस पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी चिंता जताई थी।