नेचुरल प्यूरीफायर हैं मुनगा के बीज

भाटापारा

कोएंगुलेंट बनाता है इसे प्राकृतिक जल शोधक

राजकुमार मल

भाटापारा- पत्तियां कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करतीं हैं। जड़ें मृदा संरक्षण में योगदान देती हैं। फल बढ़ाते हैं किसानों की आय। सबसे महत्वपूर्ण गुण यह कि बीज गंदे पानी को शुद्ध करने की क्षमता रखते हैं क्योंकि बीज में प्राकृतिक कोएंगुलेंट नामक मेडिशनल प्रॉपर्टीज का खुलासा हुआ है। जिसकी मदद से पानी में बैक्टीरिया और गंदगी अलग की जा सकती है।

नाम है मोरिंगा ट्री। पहचाना जाता है मुनगा, सहजन और सोजन के रूप में। लेकिन वानिकी वैज्ञानिकों के बीच इसे मिरेकल ट्री, ट्रीऑफ़ लाइफ और ड्रम स्टिक ट्री के रूप में इसलिए जाना जाता है क्योंकि इसका हर भाग पत्ती, फूल, फल ,बीज, छाल और जड़ न केवल मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी है बल्कि जलवायु परिवर्तन के दौर में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की क्षमता भी रखता है।


पोषण का पावर हाउस

शीघ्र बढ़वार और कम पानी में भी पनपने वाले मुनगा की पत्तियों में विटामिन ए, सी और ई की भरपूर मात्रा होती है। कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे महत्वपूर्ण औषधीय तत्व भी मिले हैं। दूध से अधिक कैल्शियम, संतरे से अधिक विटामिन, पालक से ज्यादा आयरन और केले से अधिक मात्रा में पोटैशियम की मात्रा का होना पाया गया है।


औषधिय महत्व

इसके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। आम हो चली मधुमेह और उच्च रक्तचाप को नियंत्रण में रखा जा सकता है। सूजन और जीवाणु रोधी तो है ही, हड्डियों और जोड़ों को मजबूत रखता है। त्वचा और बालों के लिए मोरिंगा का तेल बना रहीं हैं, सौंदर्य प्रसाधन सामग्री बनाने वाली इकाइयां और आयुर्वेदिक दवाएं बनाने वाले उद्योग।


अद्भुत है यह गुण

मुनगा के बीज पर हुए अनुसंधान में प्राकृतिक कोएंगुलेंट जैसे मेडिशनल प्रापर्टी का होना प्रमाणित हुआ है, जिसकी मदद से पानी में बैक्टीरिया और गंदगी को आसानी से अलग किया जा सकता है। इसे बेहद महत्वपूर्ण गुण इसलिए माना जा रहा है क्योंकि ग्रामीण और जल संकट वाले क्षेत्र हर साल बढ़ रहे हैं। ऐसे क्षेत्रों के लिए मददगार बन सकते हैं मुनगा के बीज।


पर्यावरणीय महत्व

मुनगा की पत्तियाँ कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण बेहद मजबूती के साथ करतीं हैं। जड़ों का वृहद फैलाव मिट्टी संरक्षण में अहम योगदान देता‌ है। कम पानी वाले क्षेत्र के लिए तो यह वरदान से कम नहीं है क्योंकि सूखे दिनों में भी इसकी हरियाली बनी रहती है। बदलते जलवायु परिदृश्य और बढ़ती खाद्य एवं स्वास्थ्य चुनौती के बीच संरक्षण और वैज्ञानिक खेती की सुविधा मांग रहा है मुनगा का वृक्ष।

चमत्कारी वृक्ष है, मुनगा

मोरिंगा (मुनगा) केवल एक पोषणयुक्त वृक्ष नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के दौर में एक बहुउपयोगी समाधान है। इसकी तेज़ बढ़वार, कम पानी में जीवित रहने की क्षमता, कार्बन अवशोषण, मृदा संरक्षण और बीजों द्वारा जल शुद्धिकरण जैसे गुण इसे ग्रामीण एवं जल संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए अत्यंत उपयोगी बनाते हैं। वैज्ञानिक खेती और संरक्षण के माध्यम से मोरिंगा किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर

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