रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में विवाह पंजीकरण को लेकर बड़ा और अहम निर्णय लिया है। अब राज्य में विवाह का पंजीयन कराना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। इस संबंध में विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह व्यवस्था उन सभी दंपतियों पर लागू होगी, जिनका विवाह 29 जनवरी 2016 या उसके बाद संपन्न हुआ है।
राज्य सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ आनंद विवाह पंजीयन नियम, 2016’ के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए यह स्पष्ट किया है कि विवाह का पंजीकरण अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य प्रक्रिया होगी। अधिसूचना में कहा गया है कि विवाह पंजीकरण की जिम्मेदारी उन्हीं अधिकारियों को सौंपी गई है, जो पहले से ‘छत्तीसगढ़ विवाह का अनिवार्य पंजीयन नियम, 2006’ के अंतर्गत कार्यरत हैं।
सरकार के इस फैसले के पीछे सामाजिक और कानूनी दोनों ही दृष्टिकोण अहम माने जा रहे हैं। अनिवार्य विवाह पंजीकरण से बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों पर रोक लगेगी और फर्जी विवाह के मामलों में भी कमी आने की संभावना है।

इस नियम से महिलाओं को विशेष लाभ मिलेगा। विवाह का आधिकारिक प्रमाण होने से उनके कानूनी अधिकार अधिक सुरक्षित होंगे। संपत्ति विवाद, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में प्रमाणपत्र एक मजबूत दस्तावेज के रूप में काम करेगा। इसके अलावा विवाह प्रमाणपत्र सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, पासपोर्ट बनवाने और अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी उपयोगी साबित होगा।
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अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विवाह पंजीकरण निर्धारित प्रक्रिया और तय समय-सीमा के भीतर कराना जरूरी होगा। राज्य सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी भविष्य की कानूनी परेशानी से बचने के लिए अपने विवाह का पंजीकरण शीघ्र संबंधित अधिकृत कार्यालय में कराएं।