बुवाई का रकबा घटने का असर
राजकुमार मल
भाटापारा- भड़का हुआ है जीरा क्योंकि मांग के बावजूद बोनी का रकबा कम कर रहे हैं किसान। इसलिए उसने 260 से 400 रुपए किलो जैसी नई कीमत अपने नाम कर ली है। इस तेजी में उसे हल्दी और काली मिर्च का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है।
मसालों में अब तेजी का दौर चल पड़ा है। शुरुआत उस जीरा से हुई है, जिसकी खरीदी मसालों में पहले नंबर पर होती है। इसलिए स्वाभाविक रूप से मांग के दबाव में है जीरा। तेजी लंबे समय तक बने रहने की धारणा इसलिए व्यक्त की जा रही क्योंकि बुवाई का रकबा घटने की खबर थोक और खुदरा बाजार में पहुंच चुकी है।
धारणा तेजी की
जीरा उत्पादक क्षेत्र में बोनी का क्षेत्रफल कम किए जाने की खबर से स्टॉकिस्टों की खरीदी जोरदार निकली हुई है क्योंकि यह स्थिति दीर्घकाल का अवसर देने वाली मानी जा रही है। फलतः होलसेल और रिटेल मार्केट इस तेजी के पहले शिकार हुए हैं। असर अब खुदरा बाजार पर पड़ चुका है, जहां जीरा 260 से 400 रुपए किलो की नई ऊंचाई पर पहुंच चुका है। इसके बावजूद तेजी की धारणा बराबर बनी हुई है।
समर्थन में हल्दी और काली मिर्च
खड़ी 180 से 300 रुपए किलो और पीसी 200 से 400 रुपए किलो जैसी कीमत पर पहुंचने वाली हल्दी का समर्थन हौसला बढाए हुए हैं जीरा का क्योंकि काली मिर्च 600 से 1200 रुपए किलो जैसी कीमत के साथ पहले ही समर्थन दे चुका है तेजी की राह पर साथ चलने के लिए। जबकि शांत है मिर्च खड़ी 200 से 380 रुपए किलो पर। मांग का दबाव पीसी मिर्च में भी बना हुआ है, जिसमें प्रति किलो भाव 240 से 400 रुपए बताया जा रहा है।
सतर्क खरीदी फुटकर की
क्रय शक्ति से बाहर होती नजर आ रही है जीरा की कीमत। इसलिए रिटेल मार्केट मांग के अनुरूप ही अग्रिम सौदे कर रहा है क्योंकि कम गुणवत्ता वाली सामग्री की पहुंच बाजार तक होने की खबर है। अलबत्ता उत्पादक क्षेत्र से स्टॉकिस्टों की खरीदी भरपूर मात्रा में हो रही है क्योंकि तेजी दीर्घकाल तक बने रहने की आशंका है।