हिंदू धर्म के सबसे पावन पर्वों में से एक महाशिवरात्रि इस वर्ष 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आने वाला यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से शिव आराधना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और जीवन के समस्त कष्टों का निवारण होता है।
पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि व्रत का प्रारंभ 15 फरवरी को प्रातः 5:17 बजे से होगा, जिसका समापन अगले दिन 16 फरवरी को प्रातः 6:59 बजे के बाद पारण के साथ किया जाएगा। व्रत के दौरान अन्न का सेवन वर्जित रहता है, श्रद्धालु फल और दूध जैसे फलाहारी पदार्थों का उपयोग कर सकते हैं। शास्त्रानुसार इस विशेष रात्रि में जागरण करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
पूजा के विशेष मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे:
निशिता काल पूजा का समय 15 फरवरी की रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक रहेगा। रात्रि के प्रथम प्रहर की पूजा शाम 6:11 बजे से रात 9:23 बजे तक की जा सकेगी। द्वितीय प्रहर की पूजा रात 9:23 बजे से 16 फरवरी को मध्यरात्रि 12:35 बजे तक होगी। तृतीय प्रहर की पूजा 16 फरवरी को रात 12:35 बजे से तड़के 3:47 बजे तक और चतुर्थ प्रहर की पूजा प्रातः 3:47 बजे से सुबह 6:59 बजे तक संपन्न होगी।
व्रत की विधि के अनुसार, भक्तों को ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके पश्चात शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर पूजन करना चाहिए। पूरे दिन संयम रखते हुए “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना फलदायी होता है। संध्या के समय शिव आरती और शिव पुराण का पाठ करना उत्तम है। अगले दिन प्रातः 7 बजे के बाद विधिवत पूजा संपन्न कर पारण के साथ व्रत खोला जा सकता है।