सरायपाली:- शबर-सवरा समाज कल्याण संघ के तत्वावधान में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित होने वाला शबरी महोत्सव कार्यक्रम सिंघनपुर भव्य रूप से संपन्न हो रहा है। यह महोत्सव विगत कई वर्षों से निरंतर आयोजित होता आ रहा है और क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक चेतना का प्रमुख केंद्र बन चुका है। इस वर्ष महोत्सव का शुभारंभ 26 जनवरी से हुआ, जो 4 फरवरी तक विविध पारंपरिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ जारी है।
इस संबंध में विहिप की जिला संयोजिका अनिता चौधरी ने बताया कि महोत्सव परिसर में इन दिनों श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ रही है। पूरा वातावरण भक्ति, उल्लास और लोकसंस्कृति की रंगत से सराबोर दिखाई दे रहा है। इस आयोजन में धनुयात्रा, मीनाबाजार, डंडा नृत्य, फूलझरी नाटक जैसे पारंपरिक कार्यक्रमों ने लोगों का विशेष आकर्षण प्राप्त किया। लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने क्षेत्र की समृद्ध आदिवासी परंपराओं और लोककलाओं को जीवंत कर दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में उत्साह का माहौल देखा गया।

महोत्सव का प्रमुख आकर्षण “कंस दरबार” रहा, जिसमें धार्मिक कथा के साथ सामाजिक संदेशों का भी प्रभावी समावेश किया गया। इस विशेष अवसर पर समाज और राष्ट्र सेवा से जुड़े कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। राष्ट्रीय सदस्य, मानवाधिकार आयोग सेविका एवं समाजसेविका अनीता चौधरी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उनके साथ समाजसेविका डॉ. नमिता साहू (प्रखंड संयोजिका) की उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम में समाज के प्रमुख पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की सक्रिय सहभागिता रही, जिनमें जयदेव भोई (संरक्षक), डॉ. तपन भोई (मीडिया प्रभारी), कार्यक्रम संचालक अनिल नाग, पुजारी दिलीप भोई, जदुमणि बाघ, महेंद्र आलेख भोई, चेतराम भोई, लक्ष्मण विशाल, सदानंद तथा शोभा चौधरी सहित अनेक गणमान्यजन शामिल हुए। सभी ने मिलकर आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कंस दरबार के दौरान अपने उद्बोधन में डॉक्टर अनिता चौधरी ने शबर-सवरा समाज की एकजुटता की सराहना करते हुए कहा कि यह समाज सामूहिक सहयोग और सांस्कृतिक संरक्षण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि शबरी महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, परंपरा संरक्षण और समुदायिक सद्भाव का सशक्त मंच है। ऐसे आयोजनों से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ती है और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस प्रकार के महोत्सव क्षेत्रीय पहचान को सशक्त करते हैं तथा स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करते हैं। डॉ. नमिता साहू ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की शक्ति उसकी एकता और संस्कृति में निहित होती है, जिसे ऐसे आयोजन और मजबूत करते हैं।
पूरे महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा पूजा-अर्चना, कथा-श्रवण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया जा रहा है। मीनाबाजार और पारंपरिक दुकानों में ग्रामीण हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की भी खूब खरीदारी हो रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।
इस प्रकार सिंगहानपुर का शबरी महोत्सव आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है, जो आने वाले वर्षों में भी समाज को जोड़ने और संस्कृति को संजोने का कार्य करता रहेगा।