चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन आज, 20 मार्च को मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जा रही है। मां का यह रूप तपस्या, संयम और अनंत फल देने वाला माना जाता है। जिनके एक हाथ में जप की माला और दूसरे में कमंडल है, उनकी पूजा से भक्तों को कठिन संघर्षों में भी विजय प्राप्त होती है।
शुभ मुहूर्त
मां की पूजा के लिए आज के विशेष मुहूर्त निम्नलिखित हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:50 से 05:37 तक।
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:04 से 12:53 तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:29 से 06:53 तक।
पूजा की सही दिशा और रंग
वास्तु शास्त्र के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा सबसे उत्तम है। पूजा करते समय अपना मुख उत्तर या पूर्व की ओर रखें। आज के दिन हरे रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ और शांतिदायक माना जाता है।
मां ब्रह्मचारिणी के शक्तिशाली मंत्र
पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करने से मां प्रसन्न होती हैं:
बीज मंत्र: ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:
स्तुति: या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
पूजा विधि और भोग
सुबह जल्दी स्नान कर हरे रंग के वस्त्र धारण करें।
मंदिर को गंगाजल से शुद्ध कर मां की प्रतिमा को कुमकुम और अक्षत लगाएं।
मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर, सफेद मिठाई या मिश्री का भोग लगाएं, यह उन्हें अत्यंत प्रिय है।
हाथ में फूल लेकर मां का ध्यान करें, कथा पढ़ें और अंत में आरती के साथ पूजा संपन्न करें।