LPG Crisis : मुंद्रा (गुजरात)। दुनिया भर में जारी युद्ध और तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के जोखिम भरे रास्तों को पार कर भारतीय विशालकाय जहाज ‘शिवालिक’ 46,000 मीट्रिक टन रसोई गैस (LPG) लेकर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुँच गया है। शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा संचालित यह जहाज ऐसे समय में आया है जब देश में गैस की किल्लत गहराती जा रही थी।
32 लाख से ज्यादा परिवारों को मिलेगी राहत आम आदमी के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी गैस से कितने घर रोशन होंगे? आंकड़ों के गणित को समझें तो 46,000 मीट्रिक टन का मतलब होता है कुल 4.60 करोड़ किलोग्राम गैस। भारत में एक घरेलू सिलेंडर में औसतन 14.2 किलो गैस होती है। इस हिसाब से कतर से आई इस खेप से देश के करीब 32 लाख 39 हजार सिलेंडर भरे जा सकेंगे।
किसे मिलेगी प्राथमिकता? गैस संकट की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। मुंद्रा पोर्ट पर उतरने वाली इस गैस की सप्लाई में सबसे पहले घरों (डोमेस्टिक) को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद अस्पतालों और स्कूलों की बारी आएगी, जबकि कमर्शियल इस्तेमाल के लिए गैस की आपूर्ति सबसे अंत में की जाएगी।
आयात पर निर्भरता बनी चुनौती भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है, जहाँ पिछले 10 साल में खपत 60% तक बढ़ चुकी है। वर्तमान में देश में 33 करोड़ सक्रिय उपभोक्ता हैं, लेकिन घरेलू उत्पादन कुल जरूरत का मात्र 40% ही है। यही कारण है कि भारत को अपनी 60% जरूरत के लिए कतर और यूएई जैसे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। सरकार अब पीएनजी (PNG) का इस्तेमाल करने वाले लोगों से एलपीजी कनेक्शन छोड़ने की अपील कर रही है ताकि इस संकट को कम किया जा सके।