प्रतापपुर: जनपद पंचायत प्रतापपुर की पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन योजना का बुरा हाल हो चुका है। पंचायतों को स्वच्छ बनाए जाने की मुहिम केवल खानापूर्ति करने तक ही सीमित होकर रह गई है। यहां बात कर रहे हैं प्रतापपुर जनपद की ग्राम पंचायत करंजवार की जहां पांच जनवरी 2023 से शुरू होकर चार जून 2024 को बनकर तैयार हुए साढ़े तीन लाख रुपए की लागत वाले सामुदायिक शौचालय की सुंदरता केवल उसकी दीवारों में लगे चित्रों में ही प्रदर्शित हो रही है। क्योंकि इस शौचालय में महिला एवं पुरुष के लिए अलग-अलग बनाए गए दोनों ही कक्षों में ताले लटक रहे हैं जो इसके बनने के पौने दो साल बाद भी नहीं खुल सके हैं। ताले में बंद रहने के कारण यह सामुदायिक शौचालय पूरी तरह से अनुपयोगी साबित हो रहा है। इस संबंध में ग्रामीणों ने बताया कि इस शौचालय में पानी की व्यवस्था नहीं है। छत के ऊपर पानी की टंकी तो लगी है पर यह केवल शो-पीस बनकर रह गई है क्योंकि इसमें पानी की सप्लाई के लिए कोई साधन नहीं बनाया गया है। जिसके कारण आज तक इसका एक बार भी उपयोग नहीं हो सका है। सामुदायिक शौचालय की बदहाली के कारण ग्रामीणों को शौच के लिए खुले में जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर वे कई बार पंचायत के जिम्मेदारों का ध्यानाकर्षण करा चुके हैं पर अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है। बता दें कि इससे पूर्व भी प्रतापपुर जनपद की ही ग्राम पंचायत झींगादोहर में बने सामुदायिक शौचालय में भी ताला लगा रहने का मामला सामने आ चुका है और अब करंजवार से भी यही स्थिति सामने आई है।
निर्माण का पूरा भुगतान होने के बाद भी सुविधा नहीं
बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत करंजवार में निर्मित इस सामुदायिक शौचालय के निर्माण में आए खर्च का पूरा भुगतान भी पंचायत को प्राप्त हो चुका है। इसके बावजूद इसमें शौच के लिए पानी जैसी महत्वपूर्ण सुविधा नहीं जुटाई जा रही। जिसके कारण यह शौचालय पौने दो साल से अनुपयोगी बना हुआ है। इस तरह की स्थिति से यह साबित होता है कि पंचायत में बैठे जिम्मेदारों का लक्ष्य शासकीय राशि से बने सामुदायिक शौचालय के माध्यम से ग्रामीणों को शौच की सुविधा देना नहीं बल्कि शौचालय निर्माण के नाम पर खानापूर्ति करते हुए भुगतान प्राप्त कर उसमें तालाबंदी करना था