नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकास के लिए बिजली एक अनिवार्य जरूरत बन चुकी है। दुनिया भर की प्रमुख बिजली कंपनियां न केवल ऊर्जा उत्पादन और वितरण का कार्य कर रही हैं, बल्कि अब तेजी से वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों में भी निवेश बढ़ा रही हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार, मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर अमेरिका की नेक्स्टएरा एनर्जी दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक यूटिलिटी होल्डिंग कंपनी बनकर उभरी है।
वर्तमान में नेक्स्टएरा एनर्जी की कुल वैल्यूएशन 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। वर्ष 2024 में कंपनी का राजस्व 24.8 बिलियन डॉलर दर्ज किया गया था। यह कंपनी अमेरिका और कनाडा में 16,700 से अधिक कर्मचारियों के साथ 73 गीगावाट से ज्यादा बिजली उत्पादन की क्षमता रखती है। वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर स्पेन की इबरड्रोला एसए और तीसरे स्थान पर फ्रांस की श्नाइडर इलेक्ट्रिक का नाम शामिल है।
दुनिया की शीर्ष 10 बिजली कंपनियों की सूची इस प्रकार है:
- नेक्स्टएरा एनर्जी (अमेरिका) – 18.04 लाख करोड़ रुपये
- इबरड्रोला एसए (स्पेन) – 14.81 लाख करोड़ रुपये
- श्नाइडर इलेक्ट्रिक एसई (फ्रांस) – 14.32 लाख करोड़ रुपये
- एनेल एसपीए (इटली) – 10.63 लाख करोड़ रुपये
- सदर्न कंपनी (अमेरिका) – 10.14 लाख करोड़ रुपये
- ड्यूक एनर्जी कॉर्प (अमेरिका) – 9.56 लाख करोड़ रुपये
- कॉन्स्टेलेशन एनर्जी कॉर्प (अमेरिका) – 9.19 लाख करोड़ रुपये
- नेशनल ग्रिड (यूके) – 8.09 लाख करोड़ रुपये
- अबू धाबी नेशनल एनर्जी (यूएई) – 6.54 लाख करोड़ रुपये
- विस्ट्रा कॉर्प (अमेरिका) – 4.75 लाख करोड़ रुपये
भारत के परिप्रेक्ष्य में बात करें तो एनटीपीसी लिमिटेड देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादन कंपनी बनी हुई है। पूर्व में नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन के नाम से जानी जाने वाली यह कंपनी 89,108 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ भारत की कुल बिजली आपूर्ति में लगभग 24 प्रतिशत का योगदान देती है। एनटीपीसी वर्तमान में कोयला, गैस और जल विद्युत के साथ-साथ सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों पर भी तेजी से काम कर रही है।