रायपुर। कथित शराब घोटाला मामले में करीब एक साल से जेल में बंद छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा बुधवार को रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आए लखमा का उनके परिवार, विधायक विक्रम मंडावी, सावित्री मंडावी और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में समर्थकों ने स्वागत किया। जेल से बाहर आते ही लखमा ने समर्थकों का अभिवादन किया और अपनी रिहाई को सत्य की जीत बताया।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज मामलों की सुनवाई के बाद लखमा को अंतरिम जमानत प्रदान की है। हालांकि, कोर्ट ने जमानत के साथ कुछ कड़ी शर्तें भी रखी हैं। शर्तों के मुताबिक लखमा को छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से बाहर रहना होगा और वे केवल कोर्ट में पेशी के दौरान ही राज्य में प्रवेश कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और पुलिस को अपना वर्तमान पता व मोबाइल नंबर देना अनिवार्य होगा।
प्रवर्तन निदेशालय ने कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। ईडी का आरोप है कि लखमा शराब सिंडिकेट के महत्वपूर्ण हिस्सा थे और उनके निर्देशों पर ही विभाग में नीतिगत बदलाव किए गए थे। जांच एजेंसी का दावा है कि इस सिंडिकेट के माध्यम से लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपये का कमीशन मिलता था और 36 महीनों में उन्होंने कुल 72 करोड़ रुपये प्राप्त किए। ईडी के अनुसार, इस राशि का उपयोग उनके सुकमा स्थित आवास और अन्य निर्माण कार्यों में किया गया।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला 2,100 करोड़ रुपये से अधिक का बताया जा रहा है। ईडी का आरोप है कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान अधिकारियों और कारोबारियों के एक सिंडिकेट ने सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाते हुए अवैध कमाई की थी। इस मामले में कई अन्य हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं।