बफर लिमिट पार, खरीदी बंद होने की कगार पर — किसानों की बढ़ी चिंता
जनधारा समाचार
कांकेर। नरहरपुर विकासखंड अंतर्गत आदिम जाति सेवा सहकारी समिति दबेना द्वारा संचालित ग्राम जामगांव धान खरीदी केंद्र में भारी अव्यवस्था व्याप्त है। धान का उठाव नहीं होने के कारण केंद्र पूरी तरह भर चुका है और अब पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। यदि शीघ्र परिवहन व्यवस्था शुरू नहीं की गई, तो आगामी दिनों में धान खरीदी पूरी तरह ठप होने की आशंका है, जिससे क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
बफर लिमिट से दोगुना स्टॉक, व्यवस्था चरमराई
समिति प्रबंधक इलाश मरकाम एवं धान खरीदी प्रभारी गोविंद ने बताया कि जामगांव केंद्र में अब तक लगभग 22 हजार क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है, जबकि इस केंद्र की निर्धारित बफर लिमिट मात्र 9,200 क्विंटल है। हैरानी की बात यह है कि खरीदी शुरू हुए काफी समय बीत जाने के बावजूद अब तक एक भी ट्रक से धान का उठाव नहीं हो सका है। अत्यधिक भंडारण के कारण नई फसल रखने की जगह पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
बारिश और सुरक्षा का खतरा
खुले आसमान के नीचे रखे गए हजारों क्विंटल धान पर अब मौसम की मार का खतरा मंडराने लगा है। अचानक मौसम खराब होने या बारिश की स्थिति में धान के खराब होने की पूरी संभावना है। साथ ही, इतने बड़े स्टॉक की सुरक्षा भी राम भरोसे है। समिति प्रबंधन का कहना है कि परिवहन व्यवस्था में लापरवाही और मिलर्स की उदासीनता के चलते यह गंभीर स्थिति बनी है।
किसानों में आक्रोश, आर्थिक नुकसान की आशंका
धान बेचने केंद्र पहुंचे किसानों ने बताया कि वे कई दिनों से खरीदी केंद्र के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जगह की कमी बताकर उन्हें वापस लौटा दिया जा रहा है। किसानों का कहना है कि कड़ी मेहनत से उपजाई गई फसल यदि समय पर नहीं बिकी, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और कर्ज चुकाना भी मुश्किल हो जाएगा।
अधिकारियों को अवगत, लेकिन कार्रवाई नहीं
समिति प्रबंधन के अनुसार, इस गंभीर समस्या की जानकारी संबंधित विभाग और उच्च अधिकारियों को लिखित एवं मौखिक रूप से दी जा चुकी है, बावजूद इसके अब तक धान उठाव को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
किसानों की मांग
क्षेत्र के किसानों ने जिला प्रशासन एवं शासन से मांग की है कि मिलर्स और परिवहन एजेंसियों को तत्काल निर्देश जारी कर धान का उठाव शुरू कराया जाए, ताकि खरीदी व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके और किसानों को राहत मिल सके।