सरगुजा में ‘लैंड जिहाद’ का तूल: पण्डो जनजाति की पुश्तैनी जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप, टीएस सिंहदेव के बयान पर पुतला दहन और विरोध प्रदर्शन।

( लखनपुर ,सरगुजा ) लखनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम मांजा के राजाकटेल में विशेष संरक्षित जनजाति पंडो समुदाय की पुश्तैनी और राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले भोले-भाले आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला तेजी से बढ़ता जा रहा है। पिछले एक महीने से यह विवाद गरमा रहा है, जहां बिहार, झारखंड से आए मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों पर आरोप है कि उन्होंने पण्डो जनजाति की जमीन पर मकान बनाकर बलपूर्वक कब्जा कर लिया है।
प्रभावितों का दावा है कि यह कई एकड़ भूमि का मामला है, जिसमें पण्डो और मझवार जनजाति के लोग प्रभावित हैं।
पण्डो समुदाय ने कई बार कलेक्टर, एस.पी, आईजी और स्थानीय थाने में शिकायत की, लेकिन शुरुआत में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इसके बाद भाजपा जनजाति मोर्चा के हस्तक्षेप से कुछ आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई।
पुलिस ने धमकी और कब्जे के मामले में FIR दर्ज की है, तथा प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। कमिश्नर और मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर SDM कोर्ट में धारा 170बी के तहत मामला दर्ज कर कब्जाधारियों को नोटिस जारी किया गया है।


इस बीच, पूर्व उप मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव ने बयान दिया कि ज्यादातर कब्जा गोचर भूमि पर हुआ है, न कि जनजातियों की निजी जमीन पर।
हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ मामलों में पण्डो की जमीन भी प्रभावित है।
सिंहदेव के इस बयान से पण्डो समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया।
प्रतिक्रिया में, राजाकटेल के पण्डो समाज ने नवापारा चौक (एनएच 130) पर विरोध प्रदर्शन किया और टीएस सिंहदेव का पुतला दहन किया।
प्रदर्शन में पण्डो समाज के ब्लॉक अध्यक्ष सन्मान पंडों, भाजपा जिला उपाध्यक्ष इंद्र भगत, ST मोर्चा जिला अध्यक्ष विंदेश्वरी पर, महामंत्री रविकांत उरांव, कमलेश टोप्पो, ग्राम सरपंच खेमराज सिंह, मंडल अध्यक्ष रवि महंत, महामंत्री विक्रम सिंह, गोपाल सिंह, हरकेश यादव, महेश्वर राजवाड़े सहित बड़ी संख्या में पण्डो समाज के लोग, युवा भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय निवासी शामिल हुए।


आदिवासियों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है, और वे अपनी पुश्तैनी जमीन वापस पाने तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन पण्डो समुदाय का कहना है कि बिना प्रभावी कार्रवाई के मामला हल नहीं होगा।
यह घटना सरगुजा में आदिवासी अधिकारों और भूमि संरक्षण के मुद्दे को फिर से उजागर कर रही है।

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