ग्वालियर। मध्य प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता जीतू पटवारी एक नई कानूनी मुसीबत में घिर गए हैं। ग्वालियर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने उनके खिलाफ जमानती वारंट (Bailable Warrant) जारी कर दिया है। कोर्ट ने यह सख्त कदम इसलिए उठाया क्योंकि पटवारी साहब को बुलावे के बावजूद वे सुनवाई के लिए पेश नहीं हो रहे थे। अब ग्वालियर और भिंड पुलिस उनकी लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश कर रही है।
यह पूरा विवाद पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त शुरू हुआ था। 4 मई 2024 को भिंड के उमरी थाने में उन पर एफआईआर दर्ज हुई थी। आरोप था कि पटवारी ने बसपा के देवाशीष जरारिया पर बीजेपी से मिले होने का आरोप लगाकर उनकी छवि खराब की थी। इसी मामले में 16 जनवरी 2026 को उन्हें कोर्ट ने नोटिस भेजा था, लेकिन उनकी गैर-मौजूदगी के बाद अब ₹500 का वारंट थमा दिया गया है।
राहत की बात बस इतनी है कि यह जमानती वारंट है, यानी वह मामूली रकम जमा करके जमानत ले सकते हैं। लेकिन कानून का पेंच यह है कि अब उन्हें 20 फरवरी 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में हर हाल में खुद हाजिर होना पड़ेगा। अगर वे तब भी नहीं आते हैं, तो उनकी मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती हैं। फिलहाल, सियासी गलियारों में इस वारंट को लेकर चर्चा तेज है।