जया किशोरी का जीवन मंत्र: ‘मौत को याद रखोगे, तो सुधर जाएगा जीवन’, जानें भक्ति और सही संगत का महत्व

Jaya Kishori Spiritual Message : नई दिल्ली। मशहूर कथा वाचिका और मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी ने अपने हालिया प्रवचन में जीवन और मृत्यु के बीच के गहरे संबंध को उजागर किया है। उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से बताया कि मनुष्य का जीवन केवल सांसें लेना नहीं है, बल्कि यह सही दिशा, अच्छी संगत और ईश्वर के प्रति समर्पण का नाम है। उनके अनुसार, यदि व्यक्ति अपनी मृत्यु की अनिश्चितता को स्वीकार कर ले, तो उसके जीवन के आधे पाप अपने आप खत्म हो सकते हैं।

मौत का डर या जीवन का सुधार?
जया किशोरी ने एक प्रेरक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि कैसे मृत्यु का स्मरण इंसान को नेक बना देता है। उन्होंने एक कहानी सुनाई जिसमें एक संत ने एक व्यक्ति से कहा कि उसके पास जीवित रहने के लिए केवल 10 दिन हैं। उन 10 दिनों में उस व्यक्ति ने अपने सारे बैर भुला दिए, लोगों से माफी मांगी और दान-पुण्य में लग गया।

जब वह 10 दिन बाद भी जीवित रहा और संत से कारण पूछा, तो संत ने मुस्कुराकर कहा:

“मृत्यु तो निश्चित है, पर जब तुम्हें लगा कि वह करीब है, तब तुमने सही ढंग से जीना शुरू किया। यही बदलाव अगर इंसान हर दिन महसूस करे, तो वह कभी किसी का बुरा नहीं करेगा।”

संगत का असर: आप वैसे ही बनते हैं जैसे आपके मित्र हैं
जया किशोरी ने युवाओं को विशेष संदेश देते हुए कहा कि हमारे विचारों और व्यवहार पर हमारी संगत का गहरा प्रभाव पड़ता है।

सकारात्मक संगत: यदि आप अच्छे विचारों वाले लोगों के साथ रहते हैं, तो आपकी सोच और प्रगति सकारात्मक होती है।

नकारात्मक संगत: गलत संगत न केवल चरित्र खराब करती है बल्कि सफलता के रास्ते भी बंद कर देती है। यही कारण है कि माता-पिता हमेशा बच्चों की मित्र-मंडली पर नजर रखते हैं।

भक्ति और कीर्तन में ताली का विज्ञान
कथा के दौरान उन्होंने भजन-कीर्तन में ताली बजाने के महत्व को भी समझाया। उन्होंने कहा कि ताली बजाना केवल उत्साह का प्रतीक नहीं है, बल्कि इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, आलस्य दूर भागता है और मनुष्य का अहंकार कम होता है। यह एकाग्रता बढ़ाने का एक आध्यात्मिक तरीका है।

युवावस्था में ही करें भक्ति की शुरुआत
जया किशोरी ने इस धारणा को गलत बताया कि भक्ति केवल बुढ़ापे के लिए है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब शरीर स्वस्थ और मन ऊर्जावान हो, तभी शास्त्रों का अध्ययन और ईश्वर का स्मरण करना चाहिए। भक्ति का मार्ग कठिन नहीं, बल्कि सरल और प्रेमपूर्ण है, बशर्ते उसमें पूर्ण समर्पण हो।

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