जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने छिंदवाड़ा कलेक्टर के एक आदेश को निरस्त करते हुए उन पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। न्यायालय ने यह राशि याचिकाकर्ता को भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कलेक्टर द्वारा माइनिंग अधिकारी की रिपोर्ट को बिना जांचे-परखे मंजूर करने के आचरण पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।
मामला वर्ष 2025 का है, जब परिवहन विभाग ने अवैध परिवहन में संलिप्त एक ट्रक को जब्त किया था। इस मामले में ट्रक के वास्तविक मालिक की पहचान किए बिना ही छिंदवाड़ा निवासी सारंग रघुवंशी को वाहन का मालिक बता दिया गया था। याचिकाकर्ता ने विभाग के समक्ष अपनी सफाई पेश की थी, लेकिन अधिकारियों ने उनकी दलीलों को पूरी तरह अनदेखा कर दिया। इसके बाद माइनिंग अधिकारी की एक तरफा रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने आदेश पारित कर दिया था।
न्याय के लिए सारंग रघुवंशी ने कलेक्टर के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि प्रशासनिक स्तर पर भारी लापरवाही बरती गई है और बिना तथ्यों की पुष्टि किए कार्रवाई की गई। हाईकोर्ट ने अब कलेक्टर के पुराने आदेश को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है।