नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक नई शुरुआत हुई है। दोनों देशों ने ‘अंतरिम व्यापार समझौते’ (Interim Trade Deal) के ढांचे पर अपनी सहमति दे दी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को इस ऐतिहासिक कदम की जानकारी देते हुए बताया कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों, विशेषकर एमएसएमई (MSME) और किसानों के लिए 30,000 अरब डॉलर के विशाल अमेरिकी बाजार के द्वार खुल जाएंगे।
इस समझौते की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भारत ने अपने संवेदनशील कृषि क्षेत्रों जैसे गेहूं, चावल, डेयरी उत्पाद और पोल्ट्री को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। इन क्षेत्रों में अमेरिकी आयात को कोई रियायत नहीं दी गई है। हालांकि, भारत ने अमेरिका के चुनिंदा उत्पादों जैसे पशु आहार (DDGs), बादाम, अखरोट और कुछ ताजे फलों पर आयात शुल्क कम करने का वादा किया है। यह समझौता भविष्य में होने वाले पूर्ण मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
समझौते के मुख्य बिंदु और प्रभाव:
कृषि क्षेत्र की सुरक्षा: सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण आजीविका से जुड़े उत्पादों जैसे दूध, घी, पनीर, मसाले (हल्दी, अदरक, जीरा) और अनाज को किसी भी टैरिफ रियायत से बाहर रखा गया है।
अमेरिकी आयात: भारत अगले 5 वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा, जिसमें कच्चा तेल, गैस, कोकिंग कोल और हाई-टेक उपकरण (AI/GPU) शामिल होंगे।
टैरिफ में बड़ी कटौती: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों पर लगाए गए अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ को हटाने के आदेश दे दिए हैं। अब भारतीय निर्यात पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत रह जाएगा।
रणनीतिक राहत: भारतीय ऑटो पार्ट्स और विमानन पुर्जों को अमेरिकी बाजार में विशेष कोटा और शुल्क रियायतें मिलेंगी, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा।
दोनों देशों का लक्ष्य मार्च 2026 तक एक पूर्ण औपचारिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करना है। यह डील न केवल आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि चीन के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा और ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भी भारत की स्थिति मजबूत करेगी।