दिलीप गुप्ता
सरायपाली। महासमुन्द जिले के सरायपाली विकासखण्ड अन्तर्गत शासकीय उच्च प्राथमिक शाला लिमगांव में फर्जी उपस्थिति शिकायत का प्रकरण अब महज एक प्रशासनिक जांच का विषय नही रहा, बल्कि यह ईमान, कर्तव्य और नेताओ के हस्तक्षेप के सीधे टकराव का प्रतीत बन चुका है। जांच में अनावश्यक विलंब और राजनीतिक दबाव के आरोप लगने से शिक्षा विभाग की भूमिका व जांच पर भी सवाल खडे कर दिए है। जांच अधिकारियों ने सीधे जिला शिक्षा अधिकारी को हस्ताक्षर युक्त पत्र लिखकर मामला संवेदनशील बताकर अपने आप को अलग कर जिला या उच्च अधिकारियों से जांच किए जाने की मांग की गई है ।सवाल यह है कि यह मामला संवेदनशील कैसे व क्यों हो गया ? यहां राजनैतिक दबाव की बात कही गई है । इन जांच अधिकारियों की भी जांच होनी चाहिए कि कौन नेता व प्रभावशाली लोग है जो इस मामले में हस्तक्षेप कर रहे हैं ताकि उसका भी खुलासा हो सके ।
वहीं इन जांच अधिकारियों के आवेदन को निरस्त करते हुवे अब इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी विजय लहरे ने आदेश पत्र क्रमांक 540/शिकायत /जांच /2026 दिनांक 23/01/2026 को चारों जांचकर्ता अधिकारियों को तत्काल जांच प्रतिवेदन जमा करने हेतु 23 जनवरी को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिया गया है ।
शिकायतकर्ता विनोद कुमार दास ने 18 फरवरी 2025 को सुबोध सिंह सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय, सिद्वार्थ कोमल परदेशी सचिव स्कूल शिक्षा विभाग सहित जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द को लिखित शिकायत किया है। आरोप है कि प्रधानपाठक धनीराम चौधरी लकवाग्रस्त थे। तब 01 वर्ष से अधिक समय तक विद्यालय में अनुपस्थित रहे। जबकि उनकी जगह पर जितेन्द्र साहू बाहरी युवक को मानदेय देकर धनीराम चौधरी द्वारा 6500/- महीना देकर उससे अध्यापन कराया जा रहा था । इसके बाबजूद उपस्थिति पंजी में नियमित हस्ताक्षर होते रहे, जिससे फर्जी उपस्थिति का गंभीर संदेह उत्पन हो रहा है। हालांकि तात्कालीन एसडीएम सरायपाली के औचक निरीक्षण एवं पंचनामा बयान में धनीराम चौधरी एक वर्ष से स्कूल में अनुपस्थित होने की पुष्टि हो चुकी है।
जांच में हुआ बयान दर्ज।
इस शिकायत के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा पत्र क्रमांक 6216/शिकायत//जांच/2025 दिनांक 03 /11/ 2025 को एक आदेश जारी करते हुवे चार सदस्यीय जांच दल गठित कर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया था । जांच अधिकारियो की टीम विगत 11 /12/23 को लिमगांव स्कूल पहुंच कर शिक्षक गिरधारी लाल पटेल , दिनेश पटेल , ठंडाराम टिकलिया व जितेंद्र साहू का बयान दर्ज किया गया । पंचनामा में इन सभी के हस्ताक्षरों के साथ साथ जांच अधिकारियों क्रमशः डी.एन .दीवान (ABEO) , जे.के .रावल ( ABEO) के भी हस्ताक्षर हैं । दर्ज बयान में कहा गया कि लकवाग्रस्त शिक्षक धनीराम चौधरी द्वारा जितेंद्र साहू को 6500/ प्रतिमाह वेतन देकर स्कूल पढ़ाने भेजा जाता था । 12 दिसम्बर को तात्कालीन बीईओ सरायपाली सहित 02 सहायक विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी को बयान देने हेतु बीईओ कार्यालय बसना बुलाया गया था। जिसमें तीनो बसना पहुंचे थे। यहां यह भी जांच का विषय है कि जब धनीराम चौधरी द्वारा अपने स्थान पर जितेंद्र साहू को स्कूल पढ़ाने भेजा जा रहा था तो संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य , शिक्षकों , संकुल प्रभारी /समन्वय व बाईओ ने इसे संज्ञान में क्यों नहीं लिया व अपेक्षित कार्यवाही क्यों नहीं की गई । तो क्या सभी की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा किया जा रहा था । विदित हो कि आज भी लकवाग्रस्त शिक्षक धनीराम चौधरी बोल पाने की स्थिति में नहीं हैं ।
राजनीतिक दबाब के चलते जांचकर्ताओ के हाथ कांपे।
इस मामले में जांचकर्ता अधिकारी बद्रीविशाल जोल्हे (प्रभारी बीईओ बसना), लोकेश्वर सिंह कंवर (एबीइओ बसना), अनिल सिंह साव (प्रभारी बीआरसीसी बसना), क्षीरोद्र पुरोहित (प्राचार्य आत्मानंद स्कूल बसना) के द्वारा पत्र क्रमांक ज्ञाप/1990/जांच/ 2026दिनांक 22 /1/2026 को संयुक्त हस्ताक्षरित पत्र डीईओ महासमुन्द को भेजा। पत्र के अनुसार जांचकर्ता अधिकारियो को जांच के दौरान कई राजनीतिक व्यक्तियो के फोन करके जांच को पक्ष विपक्ष में मोडने का दबाब बनाया जा रहा है, आगे इन्होने बताया कि मिडिया में एक आइएएस स्तर के अधिकारी(तात्कालीन एसडीएम सरायपाली) का नाम भी उछाला गया है। मामला संवेदनशील है, जिस कारण जांच टीम दबाब महसूस कर रही है। ऐसी परिस्थति में स्वतंत्र रूप से जांच कर पाना संभव नही है।
इसकी भी जांच जरूरी है कि ये किस राजनीतिक पार्टियो के कौन प्रभावशाली व्यक्ति है, जिन्होने दबाब बनाकर जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है । साथ ही क्या कोई जांच समिति अपने उच्च अधिकारियों को इस तरह का पत्र लिख सकती है ? आखिर जो कारण बताया गया है क्या यही कारण है या अंदर कुछ और है ? जिससे जांच दल बचने का प्रयास कर रहा है । इसके साथ ही एक आईएएस अधिकारी का नाम का बहाना क्यों लिया जा रहा है ? क्या यह अनुशासन तोड़ने का कृत्य नहीं है ?
इस संबंध मे एक जांच अधिकारी अनिल सिंह साव ने बताया कि शेष सभी जांच पूर्ण हो चुकी है । पूर्व बीईओ प्रकाश मांझी व एबीईओ डी. एन.दीवान का बयान नहीं हो सका है । दो बार उन्हें नोटिस जारी की गई है किंतु इसके बावजूद वे अपना बयान दर्ज नहीं करा रहे हैं ।
इस संबंध में जब लिमगांव के संकुल समन्वयक गिरधारी पटेल को बताया गया कि पंचनामा में आपने लिखित में स्वीकार किया है कि लकवाग्रस्त शिक्षक धनीराम चौधरी द्वारा जितेंद्र साहू को 6500/प्रतिमाह के तनख़ा पर पढ़ाने भेजा गया है पर उन्होंने कहा कि ऐसा कोई बयान मैने नहीं दिया है । शाला प्रबंधन समिति की तरफ से शिक्षा दान के तहत जितेंद्र साहू को निःशुल्क पढ़ाई के नाम से रखा गया था । किंतु इसके पक्ष में उन्होंने दस्तावेज इस संवाददाता को नहीं दिखाया गया ।
विदित हो कि शिक्षा विभाग खासकर सरायपाली व बसना विकासखंड कार्यालय के साथ ही अनेक स्कूलों में आए दिनों विभिन्न भ्रष्टाचार व अनियमितताओं की शिकायतें आती रहती है । इसी के चलते कुछ लिपिकों को इन आरोपों के चलते निलंबित भी किया गया है । इसके साथ ही दोनों ब्लॉक के बीईओ को भी हटा दिया गया था । किंतु इसके बावजूद विभाग में विवाद की स्थिति कम होने का नाम नहीं ले रही है ।
इस संबंध में धनीराम चौधरी द्वारा अपने स्थान पर पढ़ाने भेजने वाले जितेंद्र साहू से संपर्क किए जाने का प्रयास किया गया किंतु उन्होंने फोन ही रिसीव नहीं किया ।


