बिलासपुर, 29 मार्च 2026
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच ने बिलासपुर के ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल और नारायणा टेक्नो स्कूल में सीबीएसई पाठ्यक्रम की मान्यता के नाम पर छात्रों को प्रवेश देने और नियमों के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया है। शिक्षा के अधिकार (आरटीई) से संबंधित एक याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव को नए शपथ पत्र के माध्यम से वस्तुस्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
भिलाई निवासी सीवी भगवंत द्वारा निजी स्कूलों की मनमानी और गरीब बच्चों को प्रवेश न देने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिवक्ता देवर्शी ठाकुर ने हालिया घटनाक्रम को न्यायालय के समक्ष रखा। उन्होंने बताया कि ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल ने अभिभावकों को सीबीएसई पाठ्यक्रम की जानकारी देकर प्रवेश दिया था। स्कूल ने फरवरी और मार्च के प्रथम सप्ताह तक आंतरिक परीक्षाएं भी आयोजित कर ली थीं। इसके बाद अचानक राज्य शासन के निर्देशों का हवाला देते हुए कक्षा 5वीं और 8वीं के छात्रों को सीजी बोर्ड की परीक्षा में शामिल होने के लिए कहा गया, जिससे छात्र और अभिभावक असमंजस की स्थिति में हैं।
अभिभावकों का आरोप है कि उन्हें बोर्ड परीक्षा के बारे में मात्र एक दिन पहले सूचित किया गया, जिससे बच्चों को तैयारी का समय नहीं मिला। इस अव्यवस्था से नाराज होकर अभिभावकों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव भी किया था। उल्लेखनीय है कि ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल के विभिन्न परिसरों में पहले ही आंतरिक परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं, जिसके बाद दोबारा बोर्ड परीक्षा के दबाव ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी तरह, अमेरी चौक स्थित नारायणा टेक्नो स्कूल पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। स्कूल द्वारा कक्षा 1 से 8 तक सीबीएसई पाठ्यक्रम के नाम पर भारी शुल्क वसूला जा रहा है, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी विजय तांडे के अनुसार, कक्षा 8वीं तक सीबीएसई की संबद्धता का प्रावधान नहीं होता है और ये कक्षाएं राज्य शासन के नियमों के अधीन संचालित होती हैं। स्कूल प्रबंधन द्वारा सीबीएसई संबद्धता से संबंधित कोई भी आधिकारिक दस्तावेज विभाग में जमा नहीं किया गया है।
न्यायालय को यह भी अवगत कराया गया कि जब भी अभिभावक इन अवैध गतिविधियों के विरुद्ध आवाज उठाते हैं, तो स्कूल प्रबंधन द्वारा उन पर आपराधिक मामले दर्ज कराने की धमकी दी जाती है। मुख्य न्यायाधीश ने इन सभी बिंदुओं पर स्कूल शिक्षा सचिव से विस्तृत जवाब तलब किया है। इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।