हाईकोर्ट का अहम फैसला: रिश्वत की मांग साबित न होने पर बीएसएनएल के पूर्व अधिकारी बरी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा वर्ष 2007 में सुनाई गई सजा को रद्द कर दिया है। अदालत ने बीएसएनएल के पूर्व सब-डिविजनल ऑफिसर (एसडीओ) संजय कुमार शर्मा को रिश्वत लेने के आरोपों से बरी करते हुए स्पष्ट किया कि केवल रकम की बरामदगी किसी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रजनी दुबे की एकलपीठ ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत दोषसिद्धि के लिए यह साबित करना अनिवार्य है कि आरोपी ने रिश्वत की मांग की थी। सीबीआई के आरोपों के अनुसार, 20 जून 2003 को बिलासपुर में पदस्थ एसडीओ संजय कुमार शर्मा को ठेकेदार के.पी. अग्रवाल से लंबित बिलों के भुगतान के बदले 40 हजार रुपये लेते हुए पकड़ा गया था। सीबीआई ने इसे कुल 80 हजार रुपये की रिश्वत की पहली किस्त बताया था।

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मुख्य शिकायतकर्ता के.पी. अग्रवाल का निधन हो जाने के कारण उनका प्रतिपरीक्षण नहीं हो सका। इसके अलावा, शिकायतकर्ता के पुत्र और अन्य गवाहों ने भी अभियोजन का समर्थन नहीं किया। हाईकोर्ट ने पाया कि गवाहों ने रिश्वत की मांग होते हुए न तो देखा और न ही सुना था। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि बिना ठोस प्रमाण और गवाहों के समर्थन के केवल राशि की बरामदगी के आधार पर आरोपी को अपराधी नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर आरोपी को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया।

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