बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पति और उसके परिजनों पर दहेज उत्पीड़न के साथ-साथ टोनही प्रताड़ना जैसे गंभीर और सामाजिक रूप से अपमानजनक झूठे आरोप लगाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। डिवीजन बेंच ने इसी आधार पर पति की तलाक याचिका को मंजूरी दे दी है।
यह मामला बलौदाबाजार निवासी दिनेश साहू और पद्मा साहू से जुड़ा है, जिनका विवाह 15 फरवरी 2015 को हुआ था। पति का आरोप था कि शादी के कुछ दिनों बाद ही पत्नी ने अलग रहने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद उसने पति और उनके परिवार के पांच सदस्यों के खिलाफ दहेज और टोनही प्रताड़ना का मामला दर्ज करा दिया।
पति ने इसके बाद फैमिली कोर्ट बलौदाबाजार में क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक के लिए याचिका दायर की थी, जिसे निचली अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि आरोप साबित नहीं हुए हैं। इसके बाद पति ने हाईकोर्ट में अपील की।
हाईकोर्ट के जस्टिस संजय के अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान पाया कि पति और उसके परिवार को सात साल तक झूठे मुकदमों का सामना करना पड़ा। अदालत ने कहा कि टोनही जैसे सामाजिक रूप से कलंकित करने वाले आरोप लगाना पति और उसके परिवार के लिए गंभीर मानसिक पीड़ा का कारण है।
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया और पति के पक्ष में तलाक की डिक्री जारी कर दी। साथ ही, अदालत ने पत्नी को यह छूट भी दी है कि वह कानून के तहत गुजारा भत्ता के लिए अलग से आवेदन कर सकती है।