देवभोग में सागौन लकड़ी के अवैध कारोबार का खुलासा, 18 नग लठ्ठा जब्त और मुख्य आरोपी फरार

गरियाबंद। देवभोग नगर के समीप एक खेत में सागौन की लकड़ियों के अवैध चिरान और व्यापार का बड़ा मामला प्रकाश में आया है। वन विभाग की टीम ने घेराबंदी कर मौके से 18 नग सागौन लठ्ठा, 2 नग चिरान और लकड़ी काटने के औजार जब्त किए हैं। कार्यवाही के दौरान दो मजदूरों को हिरासत में लिया गया है, जबकि अवैध कारोबार का मुख्य सरगना मौके से भागने में सफल रहा।

वन विभाग को सूचना मिली थी कि राजापारा तालाब से लगभग एक किलोमीटर दूर एक खेत में लंबे समय से सागौन के पेड़ों को काटकर उनका चिरान बनाया जा रहा है। सूचना के आधार पर देवभोग रेंजर अश्वनी कुमार मुरचुलिया के नेतृत्व में टीम ने दबिश दी। मौके पर खरत राम और अंगद राम नामक दो मजदूर सागौन का चिरान बनाते रंगे हाथ पकड़े गए। पूछताछ में मजदूरों ने बताया कि वे देवभोग निवासी बलभद्र नागेश के लिए लंबे समय से काम कर रहे हैं। वन विभाग ने मुख्य आरोपी बलभद्र के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी की तलाश में उसके घर पर कई बार दबिश दी गई, लेकिन वह फरार मिला।

रेंजर अश्वनी कुमार मुर्चुलिया के अनुसार, जब्त की गई लकड़ी का कुल आयतन 0.732 घन मीटर है, जिसकी सरकारी कीमत 40,526 रुपये आकी गई है। विभाग अब उन खेतों के स्वामियों को भी नोटिस जारी करने की तैयारी में है जहां पेड़ों के ठूंठ मिले हैं। यदि पेड़ों की कटाई के लिए वैध अनुमति नहीं पाई गई, तो संबंधित भू-स्वामियों पर भी कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

बताया जा रहा है कि आरोपी पिछले पांच वर्षों से इस अवैध कार्य में संलिप्त था और उसने सैकड़ों इमारती पेड़ काट डाले हैं। मजदूरों के बयान के अनुसार, आरोपी औसतन 5 से 10 हजार रुपये में पेड़ खरीदता था और उसका चिरान व चौखट बनाकर बाजार में ऊंचे दामों पर बेचता था। उल्लेखनीय है कि निजी या राजस्व भूमि पर इमारती पेड़ काटने के लिए प्रशासन से विधिवत अनुमति लेना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में नियमों को ताक पर रखकर अवैध कटाई की जा रही थी।

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