नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हंगामे की भेंट चढ़ गई। विपक्षी दलों के कड़े विरोध और शोर-शराबे के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना जवाब नहीं दे पाए। सदन की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा, जिसके चलते कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित नहीं हो सकी।
हंगामे की मुख्य वजह आठ विपक्षी सांसदों का निलंबन और भारत-चीन सीमा विवाद का मुद्दा रहा। शाम 5 बजे जब सदन दोबारा शुरू हुआ, तब वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि सहित विपक्ष की महिला सांसदों ने सत्तापक्ष की अग्रिम सीटों को घेर लिया। सांसदों ने प्रधानमंत्री की सीट के सामने बैनर लेकर प्रदर्शन किया, जिससे सदन में अभूतपूर्व स्थिति निर्मित हो गई। पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने बिगड़ते हालात को देखते हुए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
सदन के बाहर भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि विपक्ष प्रधानमंत्री को बोलने से रोकने की साजिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी एक ऐसी किताब का हवाला दे रहे हैं जो अभी प्रकाशित भी नहीं हुई है। वहीं, राज्यसभा में भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखी गई। कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने संसदीय परंपराओं के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की जानकारी संसद के बजाय बाहर साझा की।
दूसरी ओर, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मंत्री नियमानुसार सदन में वक्तव्य देने के लिए तैयार थे। विपक्ष के हंगामे और निलंबन के मुद्दे पर अड़े रहने के कारण बुधवार को संसद के दोनों सदनों में कामकाज प्रभावित रहा। सत्तापक्ष ने विपक्ष के इस आचरण को लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।