AIPL जॉय स्ट्रीट मामले में HRERA का हथौड़ा: निवेशकों को धोखा देने वाले बिल्डर को बड़ा झटका, भारी हर्जाने का आदेश

गुरुग्राम | फरवरी 2026

व्यावसायिक रियल एस्टेट निवेशकों के लिए एक अहम फैसले में हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) ने एडवांस इंडिया प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (AIPL) को अपने प्रोजेक्ट AIPL जॉय स्ट्रीट, सेक्टर-66, गुरुग्राम के एक अलॉटी को मुआवज़ा व ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह आदेश डेवलपर द्वारा बार-बार आश्वासन देने के बावजूद यूनिट को लीज़ पर न दे पाने के कारण पारित किया गया।

HRERA के एडजुडिकेटिंग ऑफिसर द्वारा पारित इस आदेश में कहा गया है कि आश्वस्त किराये (Assured Rental) का भुगतान न होना अलॉटी को आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, जिसके लिए डेवलपर जिम्मेदार है। अथॉरिटी ने AIPL की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि बाज़ार की परिस्थितियां या कोविड-19 महामारी उसकी जिम्मेदारी को समाप्त कर देती हैं।

लीज़िंग के झूठे आश्वासन और लंबा इंतज़ार
अलॉटी ने वर्ष 2018 में AIPL जॉय स्ट्रीट में एक फूड कोर्ट यूनिट खरीदी थी, जब डेवलपर ने नामी फूड ब्रांड्स के साथ पक्के लीज़ समझौतों और नियमित किराये का भरोसा दिलाया था। HRERA ने अपने आदेश में माना कि:

पूरी बिक्री राशि का भुगतान होने के बावजूद अलॉटी को एक भी माह का किराया नहीं मिला।

लीज़िंग को लेकर बार-बार अलग-अलग दावे किए गए और वर्षों तक अलॉटी को अंधेरे में रखा गया।

यह भी सामने आया कि डेवलपर ने कभी अलॉटी को स्वयं यूनिट लीज़ पर देने का विकल्प तक नहीं दिया।

‘निवेशक’ बताने की दलील खारिज
AIPL ने यह तर्क दिया कि शिकायतकर्ता केवल एक निवेशक है और उसे RERA के तहत राहत नहीं मिलनी चाहिए। HRERA ने इस दलील को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि:

“अलॉटी को लीजिंग और सुनिश्चित किराये के वादों के आधार पर यूनिट खरीदने के लिए प्रेरित किया गया था। इन वादों का उल्लंघन सीधे तौर पर डेवलपर की जवाबदेही तय करता है।”

ब्याज सहित मुआवज़ा देने के आदेश
HRERA ने AIPL को निर्देश दिया है कि वह कंस्ट्रक्टिव पजेशन की तारीख से लेकर यूनिट के वास्तविक रूप से लीज़ होने या अलॉटी को सौंपे जाने तक, मासिक आधार पर मुआवज़ा अदा करे। इसके साथ ही 10.85% वार्षिक ब्याज और मुकदमे का खर्च भी अलॉटी को दिया जाएगा।

डेवलपर्स के लिए कड़ा संदेश
यह फैसला उन डेवलपर्स के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है जो व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स को आश्वस्त रिटर्न और लीज़िंग टाई-अप्स के नाम पर बेचते हैं, लेकिन बाद में जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हैं। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश स्पष्ट करता है कि:

आश्वस्त किराया कोई वैकल्पिक वादा नहीं है।

पूर्ण भुगतान के बाद अलॉटी को अनिश्चितता में नहीं छोड़ा जा सकता।

बाजार मंदी या महामारी हर मामले में बचाव का आधार नहीं बन सकती।

अन्य अलॉटियों के लिए भी उम्मीद
AIPL जॉय स्ट्रीट से जुड़े कई अन्य अलॉटी पहले से ही किराये के भुगतान, पजेशन और एकतरफा मांगों को लेकर शिकायतें जता चुके हैं। ऐसे में यह आदेश भविष्य में अन्य प्रभावित अलॉटियों के मामलों के लिए भी एक मजबूत आधार बन सकता है।

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