हर्बल रंगों से सजेगी की होली: बिहान समूह की दीदियाँ तैयार कर रहीं प्राकृतिक गुलाल

हर्बल गुलाल से आत्मनिर्भर बन रहीं बिहान की दीदियाँ, होली पर हर्बल गुलाल की बढ़ी मांग

गेंदे एवं पलाश के फूल, चुकंदर, पालक भाजी, हल्दी और चंदन से बना गुलाल बाजारों में उपलब्ध

अम्बिकापुर, 02 मार्च 2026/ होली पर्व के साथ जहां बाजारों में रंगों की रौनक बढ़ी है, वहीं सरगुजा जिले में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के लिए यह पर्व आय सृजन का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। राज्य शासन की बिहान योजना के अंतर्गत जिले की महिलाओं द्वारा तैयार हर्बल गुलाल को नागरिकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।

अम्बिकापुर विकासखंड के राधे कृष्ण स्वयं सहायता समूह सहित अन्य समूहों की महिलाओं द्वारा प्राकृतिक अवयवों से गुलाल तैयार किया जा रहा है। गेंदे एवं पलाश के फूल, चुकंदर, पालक भाजी, हल्दी, चंदन तथा आरारोट जैसी सामग्रियों से निर्मित यह गुलाल पूरी तरह सुरक्षित एवं पर्यावरण के अनुकूल है।

महिलाओं ने बताया कि हर्बल गुलाल निर्माण से उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को प्राथमिकता मिलने से महिलाओं में उत्साह एवं आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

इन प्रमुख केंद्रों पर उपलब्ध है हर्बल गुलाल
आम नागरिकों की सुविधा के लिए जिले में विभिन्न स्थानों पर बिक्री केंद्र बनाए गए हैं, जहां से लोग किफायती दरों पर हर्बल गुलाल खरीद सकते हैं:
आशा बिहान बाजार (भट्ठी रोड), सी-मार्ट-पंचशील मनपसंद (कलेक्टोरेट ब्रांच के समीप), संगम स्वीट्स (बनारस रोड), घड़ी चौक के पास स्थित विभिन्न आउटलेट्स

बढ़ रही है मांग, घर-घर पहुँच रहा ‘बिहान’ का गुलाल
सरकारी और निजी आउटलेट्स के माध्यम से अब तक लगभग 215 किलोग्राम हर्बल गुलाल का विक्रय किया जा चुका है। स्थानीय बाजारों में भी इन रंगों के प्रति जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित इन प्राकृतिक रंगों का अधिक से अधिक उपयोग करें, जिससे स्थानीय ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि हो सके और एक सुरक्षित व ईको-फ्रेंडली होली मनाई जा सके।

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